करनाल में पकड़ा गया आतंकी गुरप्रीत।
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पाकिस्तान में बैठे बब्बर खालसा के आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा की ओर से ड्रोन के जरिए सरहद के इस तरफ भेजी गई विस्फोटक सामग्री और घातक हथियार सीधे गुरप्रीत सिंह के पास पहुंचते थे। इन्हें कहां छिपाया जाता था, इसकी जानकारी गुरप्रीत के अलावा किसी दूसरे साथी को नहीं होती थी।
जानकारों के मुताबिक पाक से सामग्री सुरक्षित और आसानी से भारत पहुंच जाए इसके लिए गुरप्रीत अपने साथी आकाश की सरहद के पास की जमीन का इस्तेमाल करता था। पुलिस द्वारा पकड़ी गई स्कार्पियो गाड़ी के जरिए ही विस्फोटक सामग्री भारत के अन्य राज्यों में छिपकर बैठे बब्बर खालसा के स्लीपर सेल तक पहुंचती थी। इस कार्य को और बढ़ाने के लिए गुरप्रीत के भाई अमनदीप सिंह ने लगभग तीन माह पूर्व दिल्ली नंबर की इनोवा खरीदी थी, जिस में वे विस्फोटक सामग्री व असलहा लेकर तेलंगाना के आदिलाबाद जा रहे थे।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक गुरप्रीत के माता पिता की मौत के बाद उसका पालन-पोषण दादी ने किया था। गंदी संगत के चलते परिवार ने उसे बेदखल कर दिया था। अमनदीप सिंह अपनी पत्नी संग पैतृक गांव विंजोके (मक्खू) में रह रहा था। गुरप्रीत का कोई ठिकाना नहीं था। थाना मक्खू में गुरप्रीत पर लूटपाट और एनडीपीएस के लगभग छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी गांव में परमिंदर सिंह भी रहता था, जो कार मरम्मत का कार्य करता था। उस पर भी एनडीपीएस व अन्य तीन मामले मक्खू थाना में दर्ज थे। इसी कारण वह गांव छोड़कर मल्लांवाला के किसी गांव में रहने लगा था। मल्लांवाला में भी उसने कार मरम्मत की दुकान खोली थी।
अमनदीप की पत्नी नवप्रीत कौर कहती है कि उसे मालूम नहीं था कि उसका पति गुरप्रीत के संपर्क में है। अमनदीप पहले किसी के पास ड्राइविंग का काम करता था, जो छोड़ दिया। लगभग तीन माह पूर्व ही उसने इनोवा खरीदी थी। पत्नी नहीं जानती थी कि अमनदीप ने ड्राइविंग का काम छोड़कर मौत के सामान की डिलीवरी के लिए इनोवा खरीदी है। वह समझती थी कि पति खुद की टैक्सी चला रहा है। गांव विंजोके के लोगों को भी इनके खतरनाक कार्यों के बारे में जानकारी नहीं थी।
पुलिस को गुरप्रीत की तलाश थी जबकि वह उसी इलाके में घूम रहा था और खतरनाक मंसूबों को अंजाम दे रहा था। गुरप्रीत लुधियाना जाकर रहने लगा था, वहीं पर उसने अपने साथ भूपिंदर सिंह को मिला लिया था। पुलिस के मुताबिक ये लोग तीन बार विस्फोटक सामग्री की डिलीवरी दे चुके हैं, इसके बदले में इन्हें मोटी रकम मिलती थी। पुलिस अभी तक छह बब्बर खालसा के सदस्यों को पकड़ चुकी है।