पंजाब की जेलों में मोबाइल और ड्रग्स मिलने के बाद जेल विभाग के एडीजीपी राजपाल मीणा ने प्रदेशों की तमाम जेलों में नए कदम उठाकर सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत कर दिया है।
हाल ही में जेलों में सफाई के लिए एडीजीपी ने एक बड़ा आपरेशन चलाया था, जिसमें अकेले कपूरथला की माडर्न जेल में 42 मोबाइल फोन के अलावा ड्रग्स पकड़ी गई थी। कपूरथला जेल का कामकाज देख रहे अतिरिक्त जेल सुपरिंटेंडेंट विक्रमजीत पांथे का कहना है कि आपरेशन क्लीन के बाद जेलों में एडीजीपी की हिदायतों के बाद सुरक्षा के कई कदम उठाए जा रहे हैं।
तलाशी के लिए सुरक्षा दोगुनी
जेलों में अपने सगे संबंधियों से मुलाकात करने के लिए आने वाले लोग ही अकसर मोबाइल और ड्रग्स किसी खाने पीने की वस्तु या बूटों के तलों में सीलकर अंदर भेज देते हैं। ऐसी घटनाएं भी सामने आ रही थी कि जेल के अंदर कद्दू के बीच में मोबाइल तक भेजे गए हैं। इसके लिए पहले जहां विजिटर की सिक्योरिटी और तलाशी के लिए 2-2 मुलाजिम तैनात थे, अब उनको डबल कर 4-4 कर दिया गया है।
डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए
जेलों में कोई फालतू वस्तु या मोबाइल न जा सकें, इसके लिए मुलाकात करने वालों को अब डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से होकर निकलना होगा। इससे पता चल सकेगा कि मुलाकात करने वाले के पास मोबाइल फोन है या नहीं।
सीसीटीवी कैमरे चंडीगढ़ में ऑनलाइन
सीसीटीवी कैमरों को चंडीगढ़ में अब ऑनलाइन कर दिया गया है। जेलों के मुख्य द्वार से लेकर ड्योढ़ी, मुलाकात कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं, जिनका कंट्रोल सीधा चंडीगढ़ में लिंक कर दिया गया है। वहां पर कंट्रोल रूम में बैठकर मुलाजिम हर गतिविधि को तत्काल भांप लेंगे और इसकी सूचना जेल अधिकारियों को दी जाएगी। एडीजीपी राजपाल मीणा के प्रयासों से यह प्रोजेक्ट तत्काल संभव हो गया है।
जेलों में जैमर पर सर्वे तेज
जेलों में मोबाइल न चल सके, इसके लिए जैमर लगाने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। जेलों में जैमर लगने से कोई भी कैदी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा, यहां तक कि जेलों में अधिकारी भी मोबाइल से वंचित हो जाएंगे।