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बरनाला: यूक्रेन से चंदन जिंदल का शव पहुंचा बरनाला, बक्से में बंद बेटे को देख मां-बाप ने सुध खोई 

Sat, 12 Mar 2022 03:59 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, बरनाला (पंजाब)

सार

पूर्व फार्मेसी अफसर शीशन जिंदल का बेटा चंदन जिंदल यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए 2018 में गया था। वह चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। दो फरवरी की रात उसे ब्रेन अटैक आया था।
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चंदन की मृत देह देख विलाप करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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बरनाला के रहने वाले भाजपा नेता शीशन जिंदल के परिवार के इकलौते बेटे चंदन जिंदल की पिछले दिनों यूक्रेन में ब्रेन हैमरेज होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। चंदन जिंदल की मृतक देह शनिवार को बरनाला पहुंची। जैसे ही चंदन जिंदल के शव को बॉक्स में बंद गाड़ी में से नीचे उतारा गया तो उनके माता पिता अपने इकलौते बेटे को देखकर अपना सिर पीटने लगे। उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था। 

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चंदन की मां किरन जिंदल रो रो कर बक्सा पीट कर कह रही थी कि जल्दी मेरे बेटे को बक्से से निकालो, उसका दम घुट रहा होगा। बक्से को खोला गया तो किरन कौर ने कहा कि एक बार तो बक्से से उठ जा मेरे चंदन, तुझे भेजा कैसे था और तू लौटा कैसे है, तुझे अपनी मां पर बिलकुल तरस नहीं आया। यह कहकर वे जोरों से रोने लगती। पिता शीशन कुमार का भी रो रो कर बुरा हाल था। 

पूर्व फार्मेसी अफसर शीशन जिंदल का बेटा चंदन जिंदल यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए 2018 में गया था। वह चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। दो फरवरी की रात उसे ब्रेन अटैक आया था और वह कोमा में चला गया था। चार फरवरी को डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया। बेटे की देखभाल करने के लिए पिता शीशन कुमार जिंदल व ताया कृष्ण कुमार जिंदल यूक्रेन चले गए। इसी दौरान युद्ध शुरू हो गया और चंदन जिंदल की वहां के अस्पताल में मौत हो गई थी। एक मार्च को ताया कृष्ण कुमार जिंदल वापस बरनाला लौट आए थे और कुछ दिन बाद शीशन कुमार जिंदल भी वहां से लौट आए थे। 
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बेटे की मौत की खबर के बाद से चंदन की मां किरन जिंदल और बहन रशिमा जिंदल का रो-रोकर बुरा हाल था। वह चंदन जिंदल की आखिरी झलक पाने के लिए तरस रही थी। चंदन जिंदल का स्थानीय रामबाग में अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

पीड़ित परिवार को चंदन जिंदल की मृतक देह यूक्रेन से भारत लाने में छह लाख का खर्च आया। मृतक चंदन के चचेरे भाई नीरज जिंदल ने बताया कि चंदन का शव वहां से मंगवाने के लिए छह लाख रुपये खर्च आया है। उसकी मृतक देह को बरनाला लाने के लिए पीड़ित परिवार की केंद्र व पंजाब सरकार ने कोई मदद नहीं की और न ही कोई यत्न किया, उन्होंने अपने यत्नों व अपने खर्च से ही मृतक चंदन के शव को बड़ी मुश्किल से भारत व दिल्ली से बरनाला ला पाए हैं।

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