पंजाब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के साथ ही अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक पहुंच बनाने की कवायद भी शुरू कर दी है। कांग्रेस सभी समुदायों के वोटरों में संतुलन साधते हुए आगे बढ़ेगी। खासकर हिंदू, सिख और ईसाई वोटरों पर पार्टी की नजर है। अपने सर्वधर्म संपर्क को मजबूत करने की कवायद पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली से ही शुरू कर दी थी और गुरुवार को ऐसा ही संपर्क अमृतसर में देखने को मिलेगा।
इसे कांग्रेस की व्यापक सामाजिक-सियासी पहुंच बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद 3 अक्तूबर को दिल्ली में परगट सिंह ने पहले श्री बंगला साहिब गुरुद्वारे में माथा टेका और इसके बाद श्री हनुमान मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया था कि उन्होंने पंजाब और पंजाबियों की समृद्धि व खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
अब 8 अक्तूबर को पंजाब प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेशाध्यक्ष परगट सिंह के अमृतसर दौरे का कार्यक्रम तय किया गया है। पार्टी के मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के मुताबिक पायलट सुबह 9:30 बजे श्री दरबार साहिब में माथा टेकेंगे। इसके बाद 10 बजे श्री दुर्गियाना मंदिर, 11:30 बजे रियाल्टो चौक के पास सेंट पॉल चर्च और दोपहर 12:30 बजे रामतीर्थ मंदिर जाने का कार्यक्रम है।
राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह कहते हैं कि सियासी तौर पर इन कार्यक्रमों की अहमियत इसलिए भी है कि कांग्रेस पंजाब में केवल अपने पारंपरिक सिख आधार तक सीमित रहने के बजाय हिंदू और ईसाई मतदाताओं के बीच भी संपर्क मजबूत करने का संदेश देना चाहती है। अमृतसर में एक ही दौरे के दौरान गुरुद्वारा, मंदिर, चर्च और रामतीर्थ को कार्यक्रम में शामिल करना इसी व्यापक पहुंच का संकेत देता है।
सभी को एक मंच पर लाने की चुनौती
प्रदेश कांग्रेस की नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न धड़ों को एक मंच पर लाने के साथ सामाजिक आधार का विस्तार करना है। परगट पहले ही कह चुके हैं कि चन्नी, रंधावा, बाजवा, वड़िंग समेत सभी नेता उनकी टीम का हिस्सा हैं और पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा। ऐसे में धार्मिक-सामाजिक संतुलन के साथ संगठनात्मक एकता पर जोर कांग्रेस की 2027 की चुनावी तैयारी का अहम हिस्सा बनता दिख रहा है। चूंकि पायलट भी अमृतसर पहुंच रहे हैं इसलिए उम्मीद है कि अलग-अलग धड़ों के नेता भी इन कार्यक्रमों में जरूर शिरकत करेंगे।