अभी सिर्फ 500 रुपये जुर्माना
बीज अधिनियम 1966 के वर्तमान प्रावधान काफी उदार हैं, जो इस अपराध को रोकने में पर्याप्त नहीं है और यही वजह है कि अपराधी कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करके मिलावटी बीज बेचने में जुटे हैं। अधिनियम की धारा 19 के तहत पहली बार अपराध करने पर पांच सौ रुपए तक का जुर्माना और दोबारा पकड़े जाने पर आरोपियों को छह महीने तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। इन प्रावधानों की वजह से नकली/मिलावटी और गैर मानक बीजों की बिक्री को रोकना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
सजा में यह भी प्रावधान किया गया है
हरियाणा सरकार ने अपने ड्राफ्ट में जो प्रावधान किया है, उनमें पहली बार दोषी पाए जाने पर बीज कंपनी निर्माता की सजा एक साल से कम नहीं होगी और जुर्माना भी एक लाख से नीचे नहीं लगाया जाएगा। दोबारा पकड़े जाने की स्थिति में न्यूनतम दो साल की सजा और जुर्माना तीन लाख रुपये से कम नहीं लगाया जाएगा। वहीं, डीलर व कारोबारी के मामले में न्यूनतम छह महीने की कैद व जुर्माना पचास हजार रुपये से कम नहीं होगा। दोबारा अपराध में संलिप्त पाए गए तो न्यूनतम एक वर्ष का कारावास और जुर्माना एक लाख रुपये से कम नहीं होगा।
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में की थी घोषणा
बीते साल 13 नवंबर को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने अपने अभिभाषण में कड़े कानून लाने का जिक्र किया था। उस दौरान उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा था, नकली खाद, बीज व कीटनाशक कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हरियाणा सरकार इस पर रोक लगाने के लिए कड़ा कानून लाएगी और किसानों को शतप्रतिशत मुआवजा भी देने का प्रयास करेगी।