देश के योजनाबद्ध और हरियाली वाले शहरों में शुमार चंडीगढ़ के आसपास तेजी से हो रहा शहरी विस्तार जमीन की सतह को लगातार गर्म कर रहा है। 2000 से 2024 तक के 25 वर्षों के सैटेलाइट आंकड़ों के अध्ययन में यह सामने आया है।
हरियाली और बेहतर प्लानिंग के लिए पहचानी जाने वाली चंडीगढ़ और उसके आसपास की धरती अब लगातार तप रही है। 25 साल के सैटेलाइट आंकड़ों ने शहरी विस्तार के बीच बढ़ते सतही तापमान की तस्वीर सामने रखी है।
विज्ञापन
ट्राइसिटी का तापमान औसतन करीब 4 डिग्री बढ़ गया है। वर्ष 2000 से 2024 के बीच मोहाली की सतह का तापमान 5.46 डिग्री सेल्सियस, चंडीगढ़ का 4.10 डिग्री और पंचकूला का 3.15 डिग्री बढ़ा। तीनों शहरों में सबसे तेज बढ़ोतरी मोहाली में दर्ज हुई। मोहाली में सतही तापमान 32.91 से बढ़कर 38.37 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
यह अध्ययन मनिषा हुड्डा, शुंभम मोर और अभिषेक मलिक ने किया है। मनिषा हुड्डा मोटिलाल नेहरू स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स, राई, सोनीपत, शुंभम मोर राजीव गांधी गवर्नमेंट कॉलेज, साहा, अंबाला और अभिषेक मलिक पंजाब यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग से जुड़े हैं। अध्ययन 29 सितंबर 2026 को एशियन जर्नल ऑफ जियोग्राफिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
विज्ञापन
ऐसे किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के 1723 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया। इसके लिए 2000 से 2024 तक हर साल प्री-मानसून गर्मी यानी 1 मार्च से 31 मई के दौरान के सैटेलाइट आंकड़े लिए गए। लैंडसैट-5, 7, 8 और 9 से मिले आंकड़ों को गूगल अर्थ इंजिन पर प्रोसेस किया गया। इसके आधार पर जमीन की सतह का तापमान, हरियाली, निर्मित क्षेत्र और हीट स्ट्रेस का आकलन किया गया।
10 हजार पिक्सल के सैंपल से विश्लेषण
अध्ययन में पाया गया कि निर्मित क्षेत्र बढ़ने के साथ सतह पर गर्मी का असर भी बढ़ा। 2000 में निर्मित क्षेत्र से जुड़े तापीय प्रभाव का स्तर +13.69 डिग्री सेल्सियस/एनडीबीआई था, जो 2024 में बढ़कर +17.43 डिग्री सेल्सियस/एनडीबीआई हो गया। शोधकर्ताओं ने 10 हजार पिक्सल के सैंपल के आधार पर यह विश्लेषण किया।
ट्राइसिटी में दो हिस्सों में बंटी गर्मी
2024 के आंकड़ों में ट्राइसिटी क्षेत्र में गर्मी का असर एक समान नहीं मिला। 43.08 प्रतिशत क्षेत्र यानी 742.27 वर्ग किलोमीटर में थर्मल कंफर्ट की स्थिति मिली, जबकि 43.06 प्रतिशत यानी 741.92 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अत्यधिक हीट स्ट्रेस की श्रेणी में था। यानी ट्राइसिटी में एक ओर अपेक्षाकृत ठंडे और आरामदायक इलाके हैं, तो दूसरी ओर ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां सतह अत्यधिक गर्म हो रही है।
हरियाली ने चंडीगढ़ को दी राहत
अध्ययन का अहम निष्कर्ष है कि चंडीगढ़ की योजनाबद्ध हरित पट्टियां, ग्रीन कॉरिडोर और पेड़ों की छतरी सतह को गर्म होने से रोकने में मदद कर रही हैं। इसके विपरीत शहर की परिधि में तेजी से बढ़ता और अपेक्षाकृत कम योजनाबद्ध निर्माण गर्मी बढ़ाने में अधिक प्रभावी पाया गया।
शोधकर्ताओं ने ट्राइसिटी के लिए प्रशासनिक सीमाओं से आगे बढ़कर एक समान शहरी नियोजन, पेड़ों की न्यूनतम अनिवार्य कवरेज और रिफ्लेक्टिव सतहों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है।
तापमान बढ़ा, फिर भी चंडीगढ़ का मॉडल बेहतर
अध्ययन में चंडीगढ़ का औसत तापमान बढ़ने के बावजूद इसे मोहाली और पंचकूला की तुलना में बेहतर मॉडल माना गया है। इसकी वजह शहर की बनावट और हरित क्षेत्र हैं। योजनाबद्ध सेक्टर, सड़क किनारे पेड़, बड़े ग्रीन बेल्ट, पार्क और खुले स्थान गर्मी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। हालांकि बढ़ता कंक्रीट और निर्माण तापमान बढ़ाने की चुनौती पैदा कर रहे हैं। अध्ययन के मुताबिक, चंडीगढ़ की हरित और योजनाबद्ध संरचना अब भी गर्मी के असर को कम करने में मददगार है।
चंडीगढ़ की स्थिति तापमान को लेकर मोहाली और पंचकूला से बेहतर है। पंचकूला और मोहाली में खेती नहीं है, जो जमीन है वो खाली पड़ी है। इससे हीट ज्यादा बढ़ता है। बिल्डिंग कंक्रीट की है। ऐसे में ये देखना होगा कि बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने पर किस तरह काम किया जाए जिससे स्थिति गंभीर न हो। -प्रो. गौरव कलोत्रा, भूगोल विभाग प्रमुख पंजाब यूनिवर्सिटी