कैंसर का दंश झेलने वाला देश का एकमात्र सूबा पंजाब, जिसमें ट्रेन का नाम ही कैंसर एक्सप्रेस पड़ गया। रोजाना जम्मू से चलकर यह ट्रेन बठिंडा में रात 9 बजे पहुंचती है। पांच मिनट रुकने के बाद बीकानेर के लिए रवाना हो जाती है। यह ट्रेन अपने साथ न जाने कितने सपने, कितनी उम्मीदें लेकर दौड़ती है। हर शख्स सीने में अपना दर्द छिपाए इसमें सवार होता है। हालत यह है कि लोग इसका असली नाम (जम्मू-अहमदाबाद एक्सप्रेस) तक भूल चुके हैं।
सैकड़ों कैंसर पीड़ित अपनी पीड़ा लिए इस ट्रेन में बीकानेर के आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में पहुंचते हैं। मरीजों की तादाद इतनी है कि ट्रेन ठसाठस भरी होती है। 70 फीसदी मुसाफिर कैंसर पीड़ित ही होते हैं। सीट न मिलने पर फर्श पर ही सफर करते हैं।
पंजाब से आने वाले मरीजों को देखते हुए भारतीय रेल प्रशासन, राज्य सरकार के निर्देशानुसार बड़ी सहायता मुहैया करा रहा है। जोधपुर-बठिंडा ट्रेन में सफर करने वाले कैंसर पीड़ित को नि:शुल्क और एक अटेंडेंट का 25 प्रतिशत ही किराया वसूल किया जाता है। इतना ही नहीं मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल से ही मरीजों को पास बनाकर दिया जाता है।
लालगढ़ से अबोहर और अबोहर से बठिंडा होकर बीकानेर पहुंचने वाली कैंसर ट्रेन में जाने वाले कैंसर मरीजों की पिछले दो साल में कमी आई है। बठिंडा से रात 9:20 मिनट पर चलकर सुबह तीन बजे के करीब बीकानेर पहुंचने वाली ट्रेन में अब सिर्फ वो कैंसर मरीज बीकानेर जाते हैं जो बठिंडा के एडवांस कैंसर केयर सेंटर और एम्स में अपना उपचार करवाने में असमर्थ है। यह जानकारी बठिंडा के स्टेशन मास्टर प्रदीप शर्मा ने दी।
पता चला है कि अब राजस्थान सरकार ने पंजाब से बीकानेर आने वाले कैंसर मरीजों के लिए कुछ सख्ती की है, जिस कैंसर मरीज के पास राजस्थान का आधार कार्ड नहीं होता उनको पूरी सुविधाएं नहीं दी जाती। इसके अलावा जिन लोगों को बीकानेर के अस्पताल की दवा से आराम मिल रहा या फिर उनकी दवा पहले से चल रही वही लोग उक्त ट्रेन में जाते हैं।