बटाला में शहीद को सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई।
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बटाला के शहीद गुरबाज सिंह का सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
अरुणाचल प्रदेश की भारत-चीन की सीमा पर तैनात भारतीय फौज के जवान गुरबाज सिंह के हिमस्खलन की चपेट में आने के कारण शहीद हो गए थे। शनिवार की शाम को शहीद गुरबाज सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मसानिया पहुंचा। शनिवार को गांव मसानिया में 22 वर्षीय शहीद गुरबाज का पूरे सरकारी और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
शहीद के पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरा गांव शहीद गुरबाज सिंह अमर रहे के जय घोष से गूंज उठा। सैनिक की टुकड़ी ने हवाई फायर करके शहीद गुरबाज को श्रद्धांजलि दी। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर शहीद के घर पहुंचा तो गुरबाज की मां हरजीत कौर और बहन की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शहीद की चिता को उनके पिता गुरमीत सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर पहुंचे सैना के अधिकारियों ने सैल्यूट कर श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर बटाला के तहसीलदार जसकरण सिंह ने शहीद गुरबाज सिंह को श्रद्धांजलि भेंट की। इस मौके पर शहीद के परिवार को आश्वासन दिया गया कि सरकारी नीतियों के तहत शहीद के परिवार की हर तरह से मदद की जाएगी। इस मौके पर गांव मसानियां के रहने वाले हरविंदर सिंह और मनजीत सिंह नागरा ने बताया कि गुरबाज सिंह तीन साल पहले भारतीय फौज में भरती हुए थे।
इस समय गुरबाज अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन की सीमा पर तैनात थे और भारतीय सेना की 62 मीडियम फील्ड रेजीमेंट में सेवांए निभा रहे थे। उन्होंने बताया कि 6 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश की भारत-चीन की सरहद पर गश्त कर रहे 7 जवान बर्फ के तूफान की चपेट में आ गए थे। इन जवानों में गुरबाज सिंह शहीद हो गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने गांव के जांबाज जवान गुरबाज सिंह पर फर्क है जिसने अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया।