भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेशाध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने भविष्य में उनकी जत्थेबंदी की सियासत में एंट्री की संभावना को सिरे खारिज कर दिया है। उगरांहा ने कहा कि ऐसा सवाल ही पैदा नहीं होता है। उनकी जत्थेबंदी किसान मजदूर समेत हरेक वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। दिल्ली आंदोलन के दौरान देश के हरेक वर्ग की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने दो टूक कहा कि किसान आंदोलन के बीच भाकियू हरियाणा के नेता गुरनाम सिंह चढूनी का चुनाव लड़ने का फैसला उचित नहीं है। खास बातचीत में उगराहां ने कहा कि आजादी दिवस की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ मोरचा खोला जाएगा। पंजाब में तीन जगहों पर (बठिंडा में सोलर पावर प्लांट, साइलो गोदाम व चन्नों के टोल प्लाजा) पर बडे़ आंदोलन होंगे। सरकारों से मांग की जाएगी कि लोगों से छीनकर कॉरपोरेट को देने का खेल बंद हो। आजादी से पहले ब्रिटिश हुकूमत से जंग लड़ी थी और अब कॉरपोरेट से संघर्ष करके आर्थिक आजादी हासिल करनी है। कॉरपोरेट की नजर देश की शिक्षा प्रणाली, सेहत, अनाज, रेल, एविएशन, बिजली आदि क्षेत्रों पर है। इन क्षेत्रों में कब्जा करके देश की जनता का जमकर आर्थिक शोषण करेंगे लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा ने देशवासियों को जगा दिया है।
उगराहां ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री पुरानी बातों को दोहरा रहे हैं। इन बातों को किसान ठुकरा चुके हैं। ‘कृषि कानून रद्द नहीं होंगे, संशोधन और बातचीत के लिए तैयार हैं’ यह बयानबाजी को पहले दिन से कृषि मंत्री दे रहे हैं। इन्हीं बयानों को दोहराकर गुमराह करने की कोशिश हो रही है। बिजली मुद्दे पर सियासी दलों द्वारा किए जा रहे वादों को झूठे करार देते हुए उगराहां ने कहा कि यह तो वोट बटोरने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। पूर्व तथा वर्तमान की सरकारों के वादे खोखले साबित हुए हैं।
लोकसभा और राज्यसभा के समानांतर चलाई गई किसान संसद को सफल बताते उगराहां ने कहा कि संयुक्त किसान मोरचा का उद्देश्य था कि विरोधी दलों के सांसद पूरे तथ्यों और जोरदार ढंग से किसानों के मुद्दे सदन में उठाएं। विरोधी दलों के सांसद, किसान संसद में पहुंचे थे और किसानों ने अपनी हरेक परेशानी तर्क के साथ सांसदों के समक्ष रखीं। किसान अपने देश व पूरी दुनिया में संदेश देने में सफल रहे हैं।