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बहिबल गोलीकांड: आरोपियों पर एक साथ आरोप तय करने की मांग, बचाव पक्ष ने पूर्व डीजीपी सैनी को मिली राहत का दिया तर्क 

Fri, 26 Nov 2021 06:17 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदकोट (पंजाब)

सार

बहिबल गोलीकांड केस में पूर्व डीजीपी सैनी, निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी बिक्रमजीत सिंह, पूर्व एसएचओ बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार, कारोबारी पंकज बांसल और सुहेल सिंह बराड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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फरीदकोट कोर्ट में पेशी से बाहर निकलते पूर्व एसएसपी चरणजीत शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल गोलीकांड केस की शुक्रवार को अतिरिक्त जिला व सेशन जज हरबंस सिंह लेखी की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान बचाव पक्ष ने एक याचिका दायर करके केस के सभी आरोपियों पर एक साथ ही आरोप तय करने की मांग रखी। तर्क दिया गया कि चूंकि इस केस में चार्जशीट राज्य के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को उच्च न्यायालय से फरवरी 2022 तक किसी भी अदालत में पेश न होने की राहत दी हुई है, ऐसे में बाकी आरोपियों पर भी यह प्रक्रिया स्थगित रखी जाए। इस याचिका पर अदालत ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए जबाव तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को रखी है।

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जानकारी के अनुसार बहिबल गोलीकांड केस में पूर्व डीजीपी सैनी, निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी बिक्रमजीत सिंह, पूर्व एसएचओ बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार, कारोबारी पंकज बांसल और सुहेल सिंह बराड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और इन दिनों जिला अदालत में इन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है। 

शुक्रवार को निलंबित आईजी उमरानंगल व सुहेल सिंह बराड़ को छोड़ कर बाकी चार आरोपी अदालत में हाजिर रहे जबकि पूर्व डीजीपी सैनी को उच्च न्यायालय से पेशी से राहत है। बचाव पक्ष के वकील एचएस सैनी ने बताया कि इससे पहले उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल करके एसआईटी से जवाब मांगा था कि उन्होंने चार्जशीट में घटनाक्रम के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मचारियों व सरकारी संपत्ति के हुए नुकसान का विवरण क्यों नहीं शामिल किया। अपने जवाब में एसआईटी के सदस्य सतिंदर सिंह ने स्वीकार किया है कि कुछ कर्मचारी घायल हुए थे। नई याचिका में उन्होंने आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की है क्योंकि पूर्व डीजीपी सैनी को फरवरी 2022 तक राहत मिली हुई है और जब तक वह निजी तौर पर पेश नहीं होते, उन पर आरोप तय नहीं हो सकते। ऐसे में सभी आरोपियों को एक साथ ही आरोप तय किए जाने चाहिए। इस याचिका पर भी 3 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान बहस होगी।

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