वैसे तो अटारी-वाघा सीमा पर रोज शाम 25 मिनट रिट्रीट सेरेमनी होती थी। कोरोना की वजह से केंद्र सरकार ने इसे सात मार्च 2020 से सैलानियों के लिए बंद कर दिया था लेकिन सीमा पर राष्ट्रीय ध्वज उतारने की रस्म अदा करने के लिए बीएसएफ और पाक रेंजर्स के बीच रिट्रीट सेरेमनी जारी रही। सरकार ने इसकी समय सीमा को 25 मिनट से घटाकर 156 सेकेंड अर्थात 2.36 मिनट कर दिया। इन 156 सेकेंड की सेरेमनी के दौरान बीएसएफ के जवान पाक रेंजर्स के साथ परेड करने के बाद देश का तिरंगा सम्मान सहित उतारने की रस्म करते थे।
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सीमांत गांव के लोगों के खिले चेहरे
कोविड संकट शुरू होने के बाद जेसीपी अटारी पर रिट्रीट सेरेमनी बंद होने से सीमांत गांवों के लोगों की जिंदगी ठहर सी गई थी, क्योंकि यहां हजारों की संख्या में पहुंचने वाले सैलानी सीमांत गांवों के लोगों की एक आय का जरिया थे। यहां तक कि छोटे बच्चे भी सैलानियों के माथे, गालों, हाथों और गर्दन पर तिरंगा बनाकर अपनी शिक्षा का खर्च निकाल लेते थे। रिट्रीट सेरेमनी बंद होने के बाद तो सन्नाटा पसर गया था और शाम को पंजाब पुलिस के कर्मचारी और बीएसएफ के कर्मचारी ही ड्यूटी करते दिखाई देते थे।
दुनिया में अनोखी है यह परेड
दो देशों के बॉर्डर पर होने वाली यह परेड दुनिया भर में अनोखी है। दुनिया के किसी भी बॉर्डर पर ऐसा कार्यक्रम नहीं होता। यही वजह है कि दोनों देशों से बड़ी संख्या पर्यटक इसे देखने आते हैं। यह परेड शाम के वक्त बार्डर के गेट बंद होने से पहले होती है।