19 अक्तूबर 2018 को दशहरा दहन कार्यक्रम के दौरान हुए जौड़ा फाटक रेल हादसे में जीआरपी ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजीएम) की अदालत में शुक्रवार को चालान पेश किया। अदालत ने इसके आधार पर सौरभ मदान सहित सभी सात लोगों को 30 जुलाई तक अदालत में पेश होने के समन जारी कर दिए हैं।
जीआरपी ने जांच में हादसे के लिए दशहरा कमेटी के अध्यक्ष सौरभ मदान, महासचिव राहुल कल्याण, कैशियर दीपक कुमार, सचिव कर्ण भंडारी, काबुल सिंह, प्रेस सचिव दीपक गुप्ता व कार्यकारिणी सदस्य भूपिंदर सिंह पर आरोप तय किए हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी लोगों के विरुद्ध समन जारी किए हैं। मीडिया से बातचीत में मदान ने कहा कि अभी उन्हें अदालत से समन नहीं मिले हैं।
जीआरपी जांच में तत्कालीन थाना जीआरपी के एसएचओ बलबीर सिंह पर भी ड्यूटी में लापरवाही का आरोप है। इसलिए उनके सेवाकाल में दो वर्ष की कमी कर दी गई है। जौड़ा फाटक के हादसे के दौरान फाटक पर ड्यूटी कर रहे फाटक मैन के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार दशहरा दहन कार्यक्रम में तैनात कुछ पुलिस मुलाजिमों के सेवाकाल में कमी की गई है।
पंजाब सरकार की ओर से हादसे की जांच के लिए नियुक्त रिटायर्ड जज अमरजीत सिंह कटारी ने जांच रिपोर्ट तीन जुलाई को सरकार को भेजी थी। हादसे के लगभग 21 महीने की जांच के बाद जारी रिपोर्ट में नगर निगम के चार अधिकारियों को आरोपी बताया गया है। निगम के इन अधिकारियों में निगम के एस्टेट अफसर सुशांत भाटिया, विज्ञापन विभाग के सुपरिंटेंडेंट पुष्पिंदर सिंह व रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट गिरीश कुमार और लैंड विभाग के रिटायर्ड इंस्पेक्टर केवल कृष्ण शामिल हैं।
अमरजीत सिंह कटारी की जांच में कमीशन ने नगर निगम कमिश्नर के पीए सुपरिंटेंडेंट अनिल अरोड़ा पर आरोप तो तय नहीं किए मगर रिपोर्ट में लिखा कि पहली नजर में अरोड़ा को इस मामले के मुख्य आरोपियों की कतार में खड़ा कर लाल स्याही से उसकी निशानदेही करनी चाहिए थी। रिटायर्ड सेशन जज अमरजीत सिंह कटारी ने अपनी रिपोर्ट में वार्ड-29 की पार्षद और मिट्टू मदान की मां विजय मदान की गवाही को झूठ का पुलिंदा बताया।