अमृतसर। पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल) में बैसाखी पर्व मनाने और अन्य गुरुधामों के दर्शनों के बाद 1944 भारतीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था वीरवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट आया।
1952 सिख श्रद्धालुओं का जत्था 12 अप्रैल 2022 को अटारी वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया था। गुरुद्वारा पंजा साहिब जाते समय रास्ते में एक श्रद्धालु की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी, जिसका शव भारत वापस भेजा गया था, जबकि सात अन्य श्रद्धालु किन्हीं अन्य कारणों के चलते पहले ही पाकिस्तान से भारत लौट आए थे।
श्रद्धालु मनजीत सिंह निवासी पटियाला ने बताया कि गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में 14 अप्रैल को खालसा साजना दिवस पर विदेशों से आई सिख संगतों सहित भारत से गए जत्थे और पाकिस्तान की संगत की तरफ से बड़ी श्रद्धा और सत्कार से पर्व मनाया गया। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में बैसाखी मनाने के बाद भारतीय सिख श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा जन्म अस्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, गुरुद्वारा सचा सौदा, गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब, गुरुद्वारा डेहरा साहिब, लाहौर, गुरुद्वारा रोड़ी साहिब के अलावा लाहौर स्थित स्थानीय गुरुधामों के दर्शन दीदार भी किए।
श्रद्धालुओं ने बताया कि इस बार भी जत्थे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संगतों को गुरुद्वारा पंजा साहिब में बाजार जाने की इजाजत नहीं मिली। इसी तरह लाहौर में संगतों को गुरुद्वारा साहिब के साथ लगते बाजारों में जाने की इजाजत थी। उन्होंने बताया कि इस बार जो पाकिस्तान प्रशासन की तरफ से बसें सिख संगतों के लिए इस्तेमाल की जा रहीं थी, उन्होंने भारतीय श्रद्धालुओं से भारतीय करंसी में पैसे वसूल किए, जो गलत है।
जत्थे के साथ भारत लौटे बख्शीश सिंह जामनियां ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि ननकाना साहिब के दर्शन करने की, जो पूरी हो गई और अन्य गुरुधामों के भी खुले दीदार हुए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में स्थित कई गुरुधामों की हालत खस्ता हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वे अपने गांव जामण (पाकिस्तान) के गुरुद्वारा सागहिब में भी दर्शन करने के लिए गए थे, जहां गुरु नानक देव जी तीन ने बार चरण डाले।