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एसजीपीसी ने 400 साला प्रकाश पर्व शताब्दी वर्ष की संपूर्णता के मौके पर करवाया गुरमति समागम

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अमृतसर। एसजीपीसी की ओर से नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 400 साला प्रकाश पर्व शताब्दी वर्ष की संपूर्णता और 401वें प्रकाश पर्व पर वीरवार को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल में गुरमति समागम करवाया गया। एसजीपीसी ने इस दौरान भारत सरकार को सिख मसलों पर गंभीर रुख इख्तियार कर का संदेश दिया।
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इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह खालसा, तरना दल के मुखी बाबा निहार सिंह हरियां वेलां, एसजीपीसी के महासचिव जत्थेदार करनैल सिंह पंजोली, बाबा तेजा सिंह खुड्डा कुराला निर्मले तथा बाबा गुरदियाल सिंह टांडे वालों ने संबोधित किया। उन्होंने कहा नौवें पातशाह जी का पूरा जीवन धर्म और मानवता की रक्षा के लिए था, लेकिन दुख की बात है कि आज सिखों के अधिकारों को दबाया जा रहा है।
लंबे समय से लटकते सिख मसले हल नहीं किए जा रहे। देश की आजादी के लिए बड़ी कुर्बानियां देने वाले सिखों सहित हर एक की धार्मिक आजादी नौवें पातशाह की सोच के अनुसार कायम रहनी चाहिए। अगर किसी के साथ धक्का होता है, तो यह समझा जाएगा कि दिल्ली की सरकार गंभीर नहीं।
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत का उद्देश्य हर एक को अपना इष्ट पूजने का अधिकार दिलाना था, लेकिन आज भारत में गुरु साहिब की सोच से उलट जाकर अल्पसंख्यकों की धर्म मान्यताओं को दबाया जा रहा है। सिख मसले हल नहीं किए जा रहे। उन्होंने कहा कि 1947 में देश के बंटवारे से लेकर अब तक सिखों के साथ किए वादे पूरे नहीं हुए और इसके चलते ही सिखों में अविश्वास का माहौल है।
इस अवसर पर एसजीपीसी के प्रधावन एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 401वें मौके पर भारत सरकार को सिख मसले हल करने की अपील की। नौवें पातशाह ने धर्म की कद्र-कीमतों को दबाने वालों के विरुद्ध आवाज उठाई थी, लेकिन आज उनके धर्म अनुयायियों को देश में धर्म की मान्यताओं पर पहरा देने से रोका जा रहा है। कभी किरपान और कभी दस्तार आदि के मसले जानबूझ कर उलझाए जा रहे हैं और दुख तो इस बात का है कि सरकारों को लिखने के बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं रहीं।
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