एसजीपीसी कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हरजिंदर सिंह धामी।
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अमृतसर। एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि कपूरथला जिला में बेअदबी मामले में 302 का केस दर्ज किया जाना गलत है। पंजाब सरकार को इसे वापस लेकर पहले जांच करनी चाहिए। क्योंकि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में तीन दिन पहले हुई बेअदबी के प्रयास में पहले जांच की गई और बाद में पुलिस ने आईपीसी की धारा 295-ए और 307 में केस दर्ज किया। एसजीपीसी प्रधान धामी ने सोमवार को यह बात आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में की।
उन्होंने कहा कि जिस तरह अमृतसर में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में जांच के बाद दोषी के खिलाफ केस दर्ज किया। उसी तरह कपूरथला मामले में भी पुलिस को पहले जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने पुलिस द्वारा गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी को हिरासत में लिए जाने को गलत बताते हुए इस केस को रद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अमृतसर के मामले में पंजाब सरकार ने सिट बना कर दो दिनों में रिपोर्ट मांगी है। सरकार की सिट से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं, क्योंकि पूर्व में हुए मामलों में कहीं सिट की रिपोर्ट अटकी हुई है तो किसी मामले में अभी तक चालान पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस की सिट द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट की इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद एसजीपीसी भी इस मामले में सिट बना कर अपने स्तर पर मामले में जांच करेगी।
एसजीपीसी प्रधान धामी ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में बेअदबी की कोशिश के बाद टास्क फोर्स पर उठे सवालों के जवाब में उनकी कार्यकुशलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बेअदबी करने के प्रयास करने वाले व्यक्ति ने 18 दिसंबर की सुबह 8.30 बजे श्री दरबार साहिब में घंटा घर की तरफ से प्रवेश करने की कोशिश की, जिसे सेवादार ने बाहर ही रोक लिया। इसके बाद सुबह 9.40 बजे लंगर वाले रास्ते से मुंह नीचे करके अंदर घुसा और वहां लंगर खाने और चाय पीने के बाद सुबह 10.19 बजे सचखंड में अंदर उतरा। 10.26 बजे सचखंड में आया लेकिन सेवादार की चौकसी के चलते हरकी पौड़ी की तरफ चला गया और परिक्रमा करता रहा और सुबह 11.45 बजे हरकी पौड़ी से नीचे उतर कर श्री अकाल तख्त वाली साइड को चला गया।
एडवोकेट धामी ने बताया कि वहां से दोपहर 2.42 बजे दर्शनी ड्योढ़ी में प्रवेश करने की कोशिश की तो सेवादार और टास्क फोर्स के जवान ने उससे पूछताछ के बाद बाहर निकाल दिया। उन्होंने बताया कि सायं करीब 4.51 बजे फिर अंदर आया तो सेवादार से बाहर निकाल दिया। सायं 5.06 बजे फिर से उसने यही प्रयास किया और अंतत: सायं 5.46 बजे वह सचखंड में प्रवेश कर गया। लगता है कि उसने कमांडो ट्रे्िनंग ले रखी थी, क्योंकि मात्र 6 सेकेंड में उसने श्री साहिब उठा कर जो किया, वह एक कमांडो ही कर सकता है। हाल ही में हुए बेअदबी के मामलों में केंद्र सरकार की साजि श होने पूछे जाने बाबत सवाल के जवाब में धामी ने सीधे तौर पर नाम तो नहीं लिया मगर कहा कि जिस दिन से किसान आंदोलन खत्म हुआ है, उसके बाद ही इन घटनाओं की शुरुआत हुई है।
एसजीपीसी के प्रधान ने पंजाब सरकार पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि वह केंद्र सरकार से धारा 295 को 295-ए सुधार क्यों नहीं करवाती। यह पंजाब सरकार की जिम्मेवारी है कि वह इसके लिए गृह मंत्री से मिले और यह सुधार करवाए। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर कहा कि वे पंजाब सरकार द्वारा गठित सिट की रिपोर्ट की इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद एसजीपीसी अपनी सिट बना कर इसमें जांच करेगी।