पंजाब में कांग्रेस के वटवृक्ष माने जाने वाले पूर्व विदेश मंत्री रघुनंदन लाल भाटिया का शनिवार को कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। वे अमृतसर से छह बार सांसद रह चुके थे। दुर्ग्याणा शिवपुरी में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। भाटिया के बड़े बेटे रमेश भाटिया ने उन्हें मुखाग्नि भेंट की। भाटिया केरल और बिहार के राज्यपाल भी रह चुके थे। वे अमृतसर की राजनीति के बाबा बोहड़ कहे जाते थे। भाटिया 1992 में नरसिम्हा राव सरकार में विदेश राज्यमंत्री भी रहे।
केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान अमृतसर म्युनिसिपल कमेटी के तत्कालीन मुखिया दुर्गा दास भाटिया ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीता था। सांसद भाटिया की एक साल बाद ही मौत हो गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने उनके भाई रघुनंदन लाल भाटिया को उपचुनाव में मैदान में उतारा। भाटिया ने यज्ञ दत्त शर्मा को हराया। इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में तत्कालीन जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉ. बलदेव प्रकाश ने रघुनंदन लाल भाटिया को मात दी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनके निधन पर शोक जताया है।
1998 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के सिख उम्मीदवार दया सिंह सोढी ने आरएल भाटिया को पराजित किया। भाटिया 23 जून 2004 से 10 जुलाई 2008 तक केरल के और 10 जुलाई 2008 से 28 जून 2009 तक बिहार के राज्यपाल रहे। राजनीति में अपनी स्वच्छ छवि के लिए जाने जाते भाटिया का कांग्रेस में काफी सम्मानीय स्थान रहा है।
शनिवार को जिला प्रशासन की ओर से एडीसी डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने दिवंगत भाटिया को श्रद्धासुमन भेंट किए। इस दौरान सुनील दत्ती, डॉ. राज कुमार, जोगिंदरपाल ढींगरा, पूर्व कैबिनेट मंत्री अश्विनी सेखड़ी भी उपस्थित रहे।
ये जिम्मेदारियां भी निभाईं
1. 1982 से लेकर 1984 तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान रहे।
2. 1983 में भाटिया दिल्ली में आयोजित 7वें एनएएन सम्मेलन में बतौर डेलीगेट शामिल हुए।
3. 1983 से 1984 तक इंडिया काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन्स के सदस्य रहे।
4. 1983 से 1990 तक इंडिया बुलगारिया फ्रेंडशिप सोसाइटी और इंडो जीडीआर फ्रेंडशिप एसोसिएशन के चेयरमैन रहे।
5. भाटिया ने संयुक्त राष्ट्र में डेलीगेट के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
6. साल 1991 में भाटिया कांग्रेस कमेटी के सचिव चुने गए।