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अमृतसर: डिप्टी सीएम रंधावा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को लिखा पत्र, एसजीपीसी प्रधान बोले- पंथक मामलों में दखल न दें

Tue, 04 Jan 2022 07:39 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नाम एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने पंथक परंपराओं के तहत बादल पिता-पुत्र को पंथ से निष्कासित करने को कहा। वहीं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान ने रंधावा के इस पत्र पर पलटवार किया और उन्हें पंथक मामलों में दखल न देने की नसीहत दी। 
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डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा। - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की ओर से पंथ को एकजुट करने की अपील के जरिये बादल दल को मजबूत करने के खिलाफ मंगलवार को जत्थेदार के नाम एक पत्र लिखा। रंधावा ने जत्थेदार के नाम लिखे पत्र को मंगलवार को खुद जत्थेदार के निजी सचिव जसपाल सिंह को सौंपा, जिसमें उन्होंने बादल पिता-पुत्र को सिख कौम से निष्कासित करने को कहा।

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उपमुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि आपकी ओर से समाचार पत्र और सोशल मीडिया के जरिये पंथ को एकजुट करने की अपील की आड़ में बादल को मजबूत करने की बात ने संगत को ठेस पहुंचाई है। बादल ने खुद पंथ और पंथक होने संबंधी साल 1996 में मोगा में हुई कांफ्रेंस के बाद भारतीय चुनाव कमीशन के पास संविधान पेश कर अलग कर लिया था। इस संबंध में होशियारपुर कचहरी में खुद को पंथक बताने वाले बादलों के खिलाफ कई बार वारंट निकल चुके हैं। 

आप (जत्थेदार) इन्हें हिदायत करें कि कोर्ट में खुद को पंथक होने या न होने संबंधी निपटारा करें। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अपने पत्र में लिखा कि श्री मंजी साहिब दीवान हाल से आपकी मौजूदगी में हुई तकरीरों में, जहां पंथ को मसंदों (धर्म को नुकसान पहुंचाने वाले) के काबिज होने से सचेत किया गया है। यह भी पूछने की जरूरत है कि पिछले समय के दौरान शिरोमणि कमेटी पर काबिज रहे मसंदों ने आप के हुक्मनामे की उल्लंघन करते हुए वोट ली।

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उन्होंने पत्र में लिखा कि हमारी सरकार ने इन मसंदों की सरकार के समय हुई बेअदबियों को गंभीरता से लेते हुए उस पर एसआईटी जांच करवाई और 2018 में बरगाड़ी बेअदबी में शामिल दोषियों को पकड़ा और जेलों में बंद किया। इनके साजिशकर्ताओं पर भी नकेल कसी, जो उस समय की एसआईटी के मुखी (रणबीर सिंह खटड़ा) ने आपके आमंत्रण पर श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होकर सभी सिख जत्थेबंदियों, विद्वानों और एसजीपीसी प्रधान के सामने बयान किया है।

रंधावा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को संबोधित करते हुए लिखा कि वे विनम्र प्रार्थना करते हैं कि सभी को ध्यान में रखते हुए पंथक परंपराओं के तहत इन पिता-पुत्र मसंदों को हाजिर कर पंथ से निष्कासित किया जाए। 

उपमुख्यमंत्री ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नाम लिखे पत्र में कहा कि इससे उत्साहित होकर उस डेरेदार ने फिल्में चलाईं और 2015 में बरगाड़ी, गुरुसर भगता में बेअदबी की घटनाओं को अंजाम दिया। इसके बाद उस समय के काबिज जत्थेदार साहिबान और एसजीपीसी को मजबूर कर पहले सौदे साध को माफी दिलाई और गुरु घर की गोलकर से इसे जायज ठहराने के लिए इश्तेहारों पर करोड़ों रुपये खर्च किए।
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रंधावा को पंथक मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं: धामी

उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंथक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि कांग्रेस ने सिखों का कत्लेआम कर सिख कौम के खात्मे का घटिया प्रयास किया था।

एसजीपीसी ने सवाल किया कि क्या सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस की ओर से किए गए सिख कत्लेआम के बारे में संगत को जानकारी देने की हिम्मत करें। उन्होंने पंजाब के उपमुख्यमंत्री को जून 1984 में श्री हरमंदिर साहिब में हुई फायरिंग पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से की गई यह बेअदबी सिख मानसिकता का हमेशा के लिए हिस्सा बन चुकी है और आने वाली पीढ़ियां कभी इसे नहीं भूलेंगी। 

उन्होंने उपमुख्यमंत्री रंधावा को चेतावनी दी कि वे अपनी सीमा में रहें और पंथक मसलों में दखल नहीं दें। एसजीपीसी प्रधान धामी ने कहा कि सिखों के पवित्र स्थान सचखंड श्री हरमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब को तबाह करने वाली कांग्रेस जमात के नेताओं को पंथ की बातें करने का कोई अधिकार नहीं और सिखों की कातिल जमात के नेताओं को अपनी पार्टी के बुरे कार्यों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है और इसके सम्मानीय जत्थेदार साहिब की शान बहुत ऊंची है।
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