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पटियाला हिंसा : देवी-देवताओं के लिए अपशब्द बोलने वाले निहंग पर केस दर्ज करने की मांग

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अमृतसर में हिंदू संगठनों के नेताओं से बातचीत करते पुलिस अधिकारी। - फोटो : AMRITSAR
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अमृतसर। हिंदू नेता विपन नैयर ने पटियाला में काली माता मंदिर में हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि जब कोई बात सिखों पर आती है तो वे आगे बढ़ कर रोष प्रदर्शन करते हैं, लेकिन अभी तक किसी भी सिख संगठन ने खालिस्तान के समर्थन में आने वाले निहंगों के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, यह चिंता की बात है। श्री सनातन महासभा के प्रधान नैयर ने हिंदू देवी-देवताओं के लिए गलत शब्दावली प्रयोग करने वाले निहंग के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की मांग करते हुए कहा कि सोमवार को वे डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस से मिलेंगे।
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उन्होंने कहा कि पटियाला में हुए काली माता मंदिर पर हमले में दोनों धड़ों में से 1-1 व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। मगर जिस निहंग ने देवी-देवताओं के लिए गलत शब्दावली का प्रयोग किया, उसके खिलाफ अभी तक भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि हमारे एक सज्जन ने श्री गुरु नानक देव जी के लिए गलत शब्दों का प्रयोग किया तो हिंदू संगठनों ने मिलकर उसके खिलाफ केस दर्ज करवा उसे गिरफ्तार करवाया। जिसकी अभी तक जमानत नहीं हो सकी। लेकिन क्या सिख संगठन भी निहंग द्वारा हिंदू देवी-देवताओं के लिए प्रयोग किए गए शब्दों की निंदा करते हुए निहंग का विरोध करेंगे।
हिंदू नेता नैयर ने कहा कि वे यह नहीं कहते कि सभी गलत हैं। लेकिन जब चुप रहकर उसका साथ दिया जाता है तो सभी बुरे बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का माहौल शांत है और हिंदू-सिख भाईचारा मिल कर रह रहा है। लेकिन बाहर बैठे कुछ लोगों का मनसूबा था पंजाब का माहौल खराब करने का, जिसमें वे कामयाब हो गए हैं। उन्होंने पटियाला में हुई घटना में प्रशासन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के लिए गलत शब्द बोलने वाले निहंग को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अगले 48 घंटों में निहंग को गिरफ्तार नहीं किया गया तो उसके खिलाफ संघर्ष को तेज करेंगे।
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पुलिस ने किया मीडिया से दूर रखने का प्रयास
वैसे तो हिंदू नेता विपन नैयर को पुलिस ने नजरबंद कर रखा है। लेकिन आज वे मीडिया के सामने पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अपने अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के तहत अपनी बात कही। इससे पहले मौके पर पहुंचे एसीपी कमलजीत सिंह ने भी उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोनों के बीच हुई बातचीत के बाद एसीपी ने उन्हें इसकी इजाजत दे दी।
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