अमृतसर। भारतीय क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से लगातार बढ़ रही ड्रोन के माध्यम से हेरोइन और हथियारों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए हाई रेंज तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है। यह तकनीक ड्रोन को शूट करने के बाद उससे मिले आंकड़ों के आधार पर ड्रोन के उड़ान भरने की लोकेशन के साथ किस-किस एरिया में उड़ान भरी है, का पता लगाने में सक्षम है।
बीएसएफ के आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों के अलावा हेडक्वार्टर में तैनात कमांडेंट और टू-आईसी स्तर के अधिकारी जहां समय-समय पर सीमा पर का दौरा करेंगे, वहीं बीएसएफ के मिनिस्ट्रियल, संचार और अन्य शाखाओं के अधिकारी भी हर माह पांच दिन तक बार्डर पर गश्त का हिस्सा बन रहे हैं। बीएसएफ पंजाब फ्रंटीअर, जालंधर के आईजी आसिफ जलाल ने सोमवार को बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर, अमृतसर में बीएसएफ, लोकल पुलिस और देश की कई एजेंसियों के सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक करके ड्रोन की कार्रवाई को रोकने पर चर्चा करते हुए बनाई रणनीति के बारे में जानकारी दी।
सुरक्षा बलों की इस बैठक में यह बात निकल कर सामने आई कि ड्रोन पर अकेले बीएसएफ, लोकल पुलिस या अन्य एजेंसियां रोक नहीं लगा सकतीं। इसमें सीमांत गांवों के लोगों का सहयोग बहुत जरूरी हैं जो बीएसएफ और लोकल पुलिस का आंख और कान बन सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सीमांत गांवों के लोगों को विश्वास में लेते हुए उन्हें इसके प्रति जागरूक किया जा सके। बीएसएफ के आईजी आसिफ जलाल ने बताया कि सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत जहां सीमांत गांवों के लोगों को कई तरह की सुविधाएं देने का काम करती है।
इससे सीमांत गांव लोगों के साथ बीएसएफ के अधिकारियों का बेहतर तालमेल स्थापित होता है। यही तालमेल ही देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सीमांत गांवों के लोगों से अपील की, कि जब भी वे अपने इलाके में ड्रोन या कोई अज्ञात वस्तु उड़ती देखें तो तुरंत इसकी जानकारी निकटतम बीएसएफ चौकी, बीएसएफ की हेल्पलाइन नंबर, पंजाब पुलिस या लोकल प्रशासन को दें, ताकि तुरंत इसके खिलाफ एक्शन लिया जा सके।