अमृतसर। अमृतसर से लोकसभा सदस्य गुरजीत सिंह औजला ने भारत-पाक सीमा की 425 किलोमीटर सरहद पर कंटीली तारों के बार किसानों के मुआवजे का मुद्दा संसद में उठाया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अमृतसर के सीमांत इलाका अटारी, लोपोके और तहसील अजनाला के करीब 3801 एकड़ 1 कनाल और 18 मरले रकबे का मुआवजा चार सालों का लंबित है।
सांसद औजला ने कहा कि साल 2018, 2019, 2020 और 2022 की करोड़ों रुपये की राशि सरकार की ओर बकाया है। उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पंजाब के सीमांत किसानों का बनता सैकड़ों करोड़ रुपये समय पर नहीं दिया जाना यह साबित करता है कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति शुभचिंतक नहीं और न ही केंद्र की इन किसानों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने की कोई योजना है। उन्होंने कहा कि भारत-पाक की जंग के दौरान सबसे ज्यादा योगदान देने वाले किसानों के साथ सरकार मतभेद भरा व्यवहार कर रही है।
उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि 2012 से 2017 तक का मुआवजा बड़ी मुश्किल से किसानों को दिलाया था और अब फिर 2017 से अब तक के बकाए में सिर्फ एक किश्त किसानों को दी गई। उन्होंने कहा कि किसानों का यह मुद्दा बार-बार उठाए जाने के बावजूद सरकार इस पर गंभीर नहीं। उन्होंने केंद्र सरकार से कही कि वह कंटीली तारों के पार खेती वाले किसानों का मुआवजा जल्द से जल्द दे और इसके साथ ही उन किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए ठोस योजना तैयार करे।
10 हजार रुपये प्रति एकड़ देती है सरकार मुआवजा
कंटीली तारों के पार खेती करना बहुत कठीन काम है। किसानों को खेती करने का पूरा समय नहीं मिलता। सुबह सिर्फ 9 बजे से लेकर सायं 4 बजे तक ही किसान अपने खेत में काम कर सकते हैं। एक सामान्य खेत के मुकाबले कंटीली तारों के पार खेत में कम उत्पादन होता है। किसानों के इस नुकसान की भरपाई करने के लिए केंद्र सरकार किसानों 10 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा कंटीली तारों के पार खेतों का देती है। किसानों को इस मुआवजे के लिए कई बार सालों इंतजार करना पड़ता है।