बटाला के गांव अम्मोनंगल में विलाप करते हुए मृतकों के रिश्तेदार।
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गांव अम्मोनंगल, जाहदपुर सेखवां और नत्त के घरों में मातम छाया हुआ है। रविवार को हुए इस सड़क हादसे ने इलाके के हर बड़े बूढे़ को गम के सागर में डूबो दिया है। इन गांवों में चिताएं तो जलीं, लेकिन घरों में चूल्हे नहीं जले। तीनों ही गांव में सोमवार को भी मातम छाया रहा।
गांव की हर गली में सफेद रंग के दुपट्टे मेें महिलाओं को तांता देखने को मिला। गांव में हर आंख नम है। गांवों में केवल रोने की आवाजें ही सुनने को मिलती रही। हस हादसे के कारण अम्मोनंगल गांव में पूर्ण रूप से मातम का माहौल छाया हुआ है।
गौरतलब है कि रविवार मेहता-अमृतसर रोड पर हुए हादसे में 10 लोग मारे गए थे। इनमें अम्मोनंगल के 5, जाहदपुर सेखवां के 2, नत्त का 1 और मेहता चौक के 2 लोग शामिल थे। गांव अम्मोंनंगल के सरपंच हरजीत सिंह ने बताया कि हादसे में उनके गांव के पांच लोगों की मौत हुई है।
उन्होंने बताया कि मरने में वालों में से परमिंदरपाल सिंह, अमरीक सिंह, तरसेम सिंह नरिंदरपाल कौर और जसकरण कौर हैं। नरिंदर कौर और जसकरण दोनों ही मां बेटी हैं। उन्होंने बताया कि अम्मोनंगल का रहने वाला अमरीक सिंह जो गांव के अड्डे पर दूध की डेयरी चलता था।
अमरीक सिंह अकसर सेवा भावना से इलाके की संगत को हर शनिवार आधी रात को दरबार साहिब लेकर जाता था। सरपंच हरजीत सिंह ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोग हर बार अमरीक सिंह के साथ हरमिंदर साहिब के दर्शन के लिए जाते थे।
परमिंदरपाल सिंह महज 18 साल का था, जो इस जत्थे के साथ पहली बार गया था और वापस नहीं आया । सरपंच ने बताया कि हादसे में मरने वाली मां- बेटी नरिंदरपाल कौर और उसकी बेटी जसकरण कौर की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि उक्त लोगों के घरों के पारिवारिक सदस्यों की चिताए तो जल गई है मगर उनके घरों कें चूल्हे ठंडे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि दुखी परिवारों को वह और गांव के लोग केवल सांत्वना दे सकते हैं।