पंजाब में पराली का जलना बदस्तूर जारी है। पराली जलाने के मामलों में एक दिन की कमी के बाद रविवार को फिर से वृद्धि दर्ज की गई। पंजाब में कुल 92 मामले सामने आए, जिनमें से सबसे अधिक 22 मामले अमृतसर जिले से और सबसे कम केवल एक मामला फरीदकोट से सामने आया। इससे सीजन में 15 सितंबर से लेकर आठ अक्तूबर तक पराली जलाने के कुल मामलों की गिनती बढ़कर 969 पहुंच गई है।
अब प्रशासन भी सख्ती के मूड में आ गया है। अमृतसर में पराली जलाने के 279 मामलों में किसानों को 697500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर द्वारा टीमों को निर्देश दिए गए हैं जिन खेतों में लगातार आग लगी रहती है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएं।
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डीसी अमित तलवार ने कहा कि अब तक हमारी टीमों को सैटेलाइट के माध्यम से 519 स्थानों पर आग लगने की सूचना मिली है। इनमें से 432 स्थानों का विभिन्न अधिकारियों द्वारा दौरा किया गया है। उन्होंने कहा कि 279 स्थानों पर पराली में आग लगने की पुष्टि हुई है और संबंधित किसानों पर लगभग 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी प्रकार पराली को आग लगाने वाले 52 किसानों को भी राजस्व रिकार्ड में लाल प्रविष्टि में दर्ज किया गया है।
तलवार ने किसानों को सुचेत करते हुए कहा कि हमारी नजर हर खेत पर है और जो भी पराली जलाएगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। प्रत्येक उपमंडल में एसडीएम आग लगने वाले क्षेत्र में पहुंचकर कार्रवाई कर रहे हैं।
एक एकड़ धान की फसल से लगभग ढाई से तीन टन पराली पैदा होती है और एक टन पराली जलाने से हमें 400 किलोग्राम कार्बनिक कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 2.5 किलोग्राम पौटाश और 12 कि.ग्रा. गंधक की हानि होती है। इसलिए किसानों को धान की पराली जलाने की बजाए उसे जमीन में मिलाकर गेहूं की बुआई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की पराली को खेतों में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, खाद डालने की जरूरत कम पड़ती है और मित्र कीटों की संख्या बढ़ने से फसल पर कीटों का आक्रमण कम होता है।
पराली जलाने के 92 नए मामले, एक्यूआई लेवल 108 पहुंचा
पंजाब में रविवार को एक्यूआई 108 दर्ज किया गया। अमृतसर का 64, लुधियाना का 140, मंडी गोबिंदगढ़ का 121, जालंधर का 104 व खन्ना का एक्यूआई 105 रहा।
धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली
साल 2021 में इस अवधि के दौरान पराली जलाने के 500 और साल 2022 में 711 मामले सामने आए थे। इससे साफ है कि सरकार के दावों के विपरीत इस साल किसानों की ओर से धड़ल्ले के साथ खेतों में पराली जलाई जा रही है। अगर साल 2022 में आठ अक्तबूर के दिन की बात करें, तो पराली जलाने के केवल 19 मामले ही सामने आए थे। रविवार को अमृतसर जिले के बाद तरनतारन में पराली जलाने के 19 मामले, पटियाला में 13, एसएएस नगर में 14, संगरूर में छह, कपूरथला में आठ, , फिरोजपुर में तीन, फतेहगढ़ साहिब व फाजिल्का में दो-दो मामले रिपोर्ट हुए हैं।