तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने को लेकर दिल्ली में किसान आंदोलन से लौट रहे किसान बलवीर सिंह बग्गे के परिवार में एक सदस्य को अभी तक न तो नौकरी ही मिली और न ही कर्ज माफी संबंधी किया वादा सरकार ने पूरा किया। नौकरी के लिए किसान बग्गे का बेटा शमशेर सिंह अपनी माता सरबजीत कौर के साथ अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर व अन्य अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काट रहा है, तो दूसरी तरफ कर्ज वसूली के लिए बैंक अधिकारी किसान के घर चक्कर काट रहे हैं। किसान नौजवान संघर्ष कमेटी के प्रदेश प्रधान बचितर सिंह कोटला ने भी सरकार की किसानों के परिवार को दी जाने वाली सुविधाओं के प्रति सरकार की लापरवाही को आड़े हाथों लिया है।
अजनाला रोड स्थित गांव बग्गे कलां निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि उनके पिता बलवीर सिंह 7 दिसंबर, 2020 को किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए सिंघु बॉर्डर पर गए थे। छोटे भाई लवप्रीत सिंह की 1 जनवरी 2021 को शादी तय थी तो उनके पिता किसान आंदोलन से 11 दिसंबर की रात बोलेरो कार से अमृतसर लौट रहे थे। इस दौरान वे टांगरा के पास शौच के लिए रुके थे। तब बहुत तेज बारिश हो रही थी। अभी उनके पिता बोलेरो से नीचे उतरे ही थे कि पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहन ने उनके पिता को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी गर्दन का मनका टूट गया और उनकी मौत हो गई। तब से ही वह अमृतसर में मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
तब सरकार ने उन्हें पांच लाख की मुआवजा राशि देने के साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और उनके पिता किसान बलवीर सिंह के नाम पर बैंक कर्ज माफ करने का वादा किया। इस बीच ही उन्होंने परिवार के गमगीन हालातों के बीच अपने छोटे भाई लवप्रीत सिंह की शादी कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 5 लाख का मुआवजा तो दे दिया, लेकिन करीब एक साल बीतने के बाद भी अभी तक न तो उन्हें नौकरी दी और न ही उनके पिता के नाम बैंक कर्ज को माफ किया। अब बैंक वाले कर्ज वसूली के लिए उनके घर में चक्कर लगा रहे हैं। जबकि वह खुद सरकार के वादे के मुताबिक सरकारी नौकरी के लिए सरकारी अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं।
वहीं किसान नौजवान संघर्ष कमेटी के प्रदेश प्रधान शमशेर सिंह ने कहा कि सरकार की आंदोलन में शहीद किसानों को लेकर कथनी और करनी में बहुत अंतर है। घटना के वक्त सरकार वादे तो कर देती है मगर बाद में उन्हें पूरा करने में लापरवाही दिखाती है। आंदोलन के दौरान शहीद किसानों के परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए वे आंदोलन को जारी रखेंगे।