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जज के नवजीवन नशा छोड़ाओं केद्रं पर चैंकिग से मचा हड़कंप

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सभी केंद्र, मरीज की मौत की खबर भी इसी फाइल में
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निजी नशा छुड़ाओ केंद्र में कैदियों की हालत में मिले मरीज
नवजीनव नशा छुड़ाओ केंद्र को जज ने किया सील
सेशन जज के विजिट में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
सेंटर से मरीज किए शिफ्ट, केंद्र संचालकों पर कार्रवाई करने की सिफारिश
कुछ साल पहले भी यातनाओं से एक युवक की हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। सिविल जज सीनियर डिविजन कम सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी राणा कंवरदीप कौर ने शनिवार को कलानौर के नवजीनव नशा छुड़ाओ केंद्र में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जज मरीजों से मिले। यहां मरीजों की हालत कैदियों से भी बदतर थी। केंद्र के हालात भी जेल से बदतर पाए गए। जज को रोगियों ने बताया कि केंद्र में एक सरताज सिंह नाम का व्यक्ति है, जो उनसे मारपीट करता रहता है। रोगियों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र का मालिक मोहन सिंह खुद नशा करने का आदि है। जबकि मोहन सिंह का कहना था कि केंद्र में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं और वह मारपीट नहीं करता है।
नवजीवन में मरीजों से मिलने के बाद जज ने कहा कि रोगियों को नशा छुड़ाओ केंद्र के बहाने टार्चर किया जा रहा है। सेशन जज ने तुरंत सिविल सर्जन को बुला कर सेंटर को सील कर दिया। इस संबंध में सिविल सर्जन डा. किशन चंद ने कहा कि उन्होंने एसएसपी को लिखित शिकायत दर्ज करवाई है कि सेंटर को चलाने वाले सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस संबंध में जब सिविल सर्जन किशन चंद से पूछा तो उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिन से इस केंद्र की चेकिंग पेंडिंग थी। जब उनसे पूछा गया कि कुछ साल पहले इस नशा छुड़ाओ केंद्र में यातनाएं देने की बात सामने आई थी, जिसमें एक मरीज की केंद्र में मौत हो गई थी। लेकिन तब किसी तरह से मामले को दबा दिया गया। इस पर उन्होंने कहा कि यह उनके ज्वाइन करने से पहले की बात हो सकती है।
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सेंटर में काटते हैं चूहे
शनिवार को सिविल जज (सीनियर डिविजन) राणा कंवरदीप कौर कलानौर रोड स्थित प्राइवेट तौर पर चल रहे नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र के दौरे पर थीं। इस दौरान केंद्र में भर्ती पिंजौर (हरियाणा) के समीर चौधरी पुत्र मकबूल ने बताया था कि वह शुगर का मरीज है। उनके कमरों में भारी संख्या में चूहे हैं। दो बार उसके पैर में चूहे ने काट लिया, इसके बावजूद उसका इलाज नहीं कराया जा रहा। उनके साथ सही बर्ताव भी नहीं किया जाता है।

केंद्र से मिला तंबाकू, गंदगी से बुरा हाल,
सीजेएम ने छापेमारी के दौरान पूरे केंद्र की चेकिंग की। उन्होंने रसोई सहित अन्य स्थानों की चेकिंग की। एक जगह बिस्तर के नीचे कुछ नशीला पदार्थ लिफाफे में गांठ बांधकर रखा था। जिसके बारे में मौके पर पहुंचे सिविल सर्जन को भी बताया गया। हालात ये थे कि यह नशा छुड़ाओ केंद्र के बजाय एक जेल की तरह था। यहां रसोई घर हालत बहुत खराब थी। शौचालयों में इतनी गंदगी थी कि पास से तो गुजरना भी मुश्किल हो रहा था। बिस्तरों से बदबू आ रही थी।

टांगें दबाने वालों को मिलता सही खाना
नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल युवाओं ने बताया कि उन्हें यहां भरपेट खाना नहीं मिलता। जो युवा केंद्र के संचालकों के के कपड़े धोते हैं, उनके कहे अनुसार घरों में सफाई करते हैं और खाना बनाते हैं, उन्हीं को को सही खाना मिलता है। यही नहीं ये संचालक मरीजों से टांगें भी दबवाते हैं। उन्हें तो खाने के साथ साथ तंबाकू आदि नशीले पदार्थ भी ये लोग स्वयं देते थे।

परिजनों से बात नहीं करने दी जाती
केंद्र में नशा छोड़ने आये मरीजों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें कैदियों की तरह रखा जाता है। परिजनों से बात तक नहीं करने दी जाती कि कहीं दाखिल मरीज केंद्र के हालात न बता दे। उनका कोई परिजन उन्हें मिलने के लिए आता है तो उन्हें बाहर से ही यह बोल कर भेज दिया जाता है कि अगर वह उन्हें मिले तो वह जल्द ठीक नहीं हो पाएंगे। परिजन भी अपने बच्चों की बेहतरी की खातिर बात मानकर मायूस होकर लौट जाते हैं।

किसी तरह का कोई इलाज नहीं मिलता
गौरतलब है कि जहां भी नशा छुड़ाओ केंद्र स्थापित किया जाता है वहां एक काउंसलर तैनात किया जाता है। यही नहीं नशे के आदि हो चुके युवाओं को फिर से नशा न करें इसके लिए साइकेट्रिस्ट भी तैनात किया जाता है, लेकिन यहां न कोई डाक्टर नहीं था। जब इसके बारे में अधिकारियों ने संचालकों से पूछा तो कुछ ही देर बाद एक डाक्टर पहुंचा जो स्वयं को एमबीबीएस बता रहा था। उसने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि वह दिन में एक आधे घंटे के लिए आते हैं। उसने बताया कि कि वह बीमार लोगों के लिए दवा लिख देते हैं। लेकिन दाखिल लोगों का कहना था कि उन्हें चाहे जितना चाहे बुखार हो या किसी तरह को कोई दर्द, उन्हें तड़पता छोड़ दिया जाता है।

लेते थे 25 हजार, पर्ची कटती थी 8 हजार की
गुरदासपुर के कलानौर रोड पर स्थित नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र में जांच के दौरान वहां भर्ती रोगी को कमरों में बंद कर बाहर ताले लगे थे। इसके बाद की गई चेकिंग में एक के बाद एक कई कमियां साफ नजर आने लगीं। केंद्र में भर्ती रोगियों से जब उन्होंने बातचीत की तो पता चला कि 1 रोगी को भर्ती करने के लिए 25 हजार रुपये लिए जाते हैं। जबकि रसीद सिर्फ 8 हजार रुपए की दी जाती है। इसके अलावा सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं था।

उपचार के दौरान अस्पताल छोड़ भागा समीर, मॉल के पास मिला शव
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। शनिवार को शाम नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र से सिविल अस्पताल में लाए गए 17 रोगियों ने स्वास्थ्य विभाग से हस्ताक्षर कर मांग की कि उन्हें इस केंद्र में हो रहे अत्याचार से छुटकारा दिलाया जाए। इस पर सेहत विभाग ने 17 रोगियों को गुरदासपुर के सरकारी अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ केंद्र में शिफ्ट कर दिया। बाकी रोगियों को उनके परिजन अपने साथ घर ले गए। सुरक्षा का जिम्मा थाना सदर के प्रभारी राजिंदर कुमार को सौंपा। इसके बाद जज के कहने पर सेहत विभाग के अफसरों ने समीर समेत 17 मरीजों को सिविल अस्पताल भेजा। लेकिन पिंजौर निवासी समीर कुछ देर सिविल अस्पताल से उपचार लेने के बाद अस्पताल से निकल भागा और ढाई घंटे बाद करीब 4 बजे उसका शव सड़क किनारे मिला। पुलिस जांच कर रही है कि उसकी मौत कैसे हुई।
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सूत्रों के अनुसार कुल 37 मरीज नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती थे। जिसमें से 17 को नवजीवन से शिफ्ट होकर सिविल अस्पताल के रिहैब सेंटर लाया गया। बाकी को जैसे जैसे लोगों को पता चला लोग अपने रिश्तेदारों को नवजीवन से घर ले गए। जो 17 मरीज सिविल अस्पतल भेजे गए वहां से भी 9 लोगों ने अपने मरीजों को घर ले जाना ही बेहतर समझा। जिससे अब सिविल अस्पताल में 6 मरीज और 6 मरीज सरकारी अस्पताल के रिहैब सेंटर में दाखिल हैं।
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