‘मैं जीतकर रहा जीरो, वह हारकर बने हीरो’
राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक को हराकर पार्षद बने गुरिंदर ऋषि नहीं लड़ेंगे चुनाव
रमेश शुक्ला सफर
अमृतसर।
निगम चुनाव को लेकर कल नामांकन भरने का आखिरी दिन है। लेकिन मंगलवार शाम तक किन-किन लोगों को टिकट मिली है यह तय नहीं हो पाया है। इसी बीच वार्ड नंबर 24 से कांग्रेस के पूर्व पार्षद रहे गुरिंदर ऋषि ने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। गुरिंदर ऋषि ने पिछले पार्षद चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मेयर व मनोनीत राज्यसभा सदस्य इंजीनियर श्वेत मलिक को हराकर सनसनी फैला दी थी। पिछले चुनाव में कांग्रेस को 65 में सिर्फ तीन ही सीटें मिली थी।
अमर उजाला के साथ खास बातचीत में गुरिंदर ऋषि ने कहा कि मैं जब राजनीति में आया और पार्षद चुनाव लड़ा तब मेरी कंपनी का टर्न ओवर 220 करोड़ रुपये था। नगर निगम का टर्न ओवर 120 करोड़ था। लोगों ने मुझे चुना और मौजूदा भाजपा के राज्यसभा सदस्य (मनोनीत) इंजीनियर श्वेत मलिक को हराया। मैं जीत कर भी जीरो रहा और वो हार कर भी हीरो यानि राज्यसभा मेंबर बन गए।
पार्षद चुनाव न लड़ने का निर्णय मेरा निजी है। चुनाव लड़ने के लिए मुझे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा और तृप्त राजिंदर बाजवा ने भी बात की। मैंने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्षद बनने के बाद भी पांच साल तक जब विधायक ही पार्षद को पावर नहीं देने देते तो वह क्या करे। सियासत में सबसे बड़ा खेल यही है। पार्षद को विधायक रबर स्टैंप समझते हैं और कुछ नहीं। मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं लेकिन कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हूं और सदैव रहूंगा।
उन्होंने कहा कि जनता पार्षद को वोट देती है विकास कार्य करवाने के लिए। मुझसे पांच साल तक कोई भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करवाए गए। मेरे इलाके में विकास कार्यों का शुभारंभ कभी तरुण चुघ (राष्ट्रीय सचिव, भाजपा) तो कहीं विधायक ओम प्रकाश सोनी (कांग्रेस) करते रहे। मैं किस मुंह से अब जनता के सामने जाकर वोट मांगूं। यही वजह है कि मैंने निर्णय कर लिया है कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा।
चुनाव में पीठ दिखाने वालों को दस साल का राजनीति वनवास
जिला भाजपा प्रधान राजेश हनी ने पार्टी हाईकमान को ऐसे कई नेताओं की लिस्ट भेजी है जो पूर्व पार्षद होते हुए भी इस बार चुनाव में पीठ दिखा दी है। हनी ने इन नेताओं को नसीहत देते हुए कहा है कि उन्हें अगले दस सालों तक पार्टी के किसी भी ओहदे पर नहीं रखा जाएगा। यही नहीं उनके परिवार के किसी भी सदस्य को पार्टी किसी भी चुनाव में टिकट नहीं देगी। हालांकि उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी। पार्टी में चर्चा है कि 17 दिसंबर को मतदान के बाद कई चेहरे भाजपा से बाहर होंगे।
पार्टी में बगावत से डरे भाजपा के कई पूर्व पार्षद
भाजपा के कई पूर्व पार्षदों को भाजपा हाईकमान ने चुनाव लड़ने को कहा लेकिन इन पूर्व पार्षदो ंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। इनमें लविंदर बंटी, अविनाश शैला, डॉ. राम चावला और पप्पू महाजन आदि के नाम शामिल हैं। पार्टी में इन पार्षदों को लेकर चर्चाएं हैं कि सूबे में कांग्रेस की सत्ता और पार्टी में बगावत के चलते भाजपा के कई पूर्व पार्षद चुनाव से पीछे हट रहे हैं।