पंजाब के हलका रायकोट में 2022 के विधानसभा चुनाव में पिछले 25 साल का रिकॉर्ड टूटने के साथ साथ इतिहास भी बदल गया है। 1992 विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब पंजाब में सरकार बनाने जा रही पार्टी का विधायक यहां से जीत गया है।
पंजाब में आतंकवाद के काले दौर से निकलने के बाद 1992 में हुए विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता ने कांग्रेस की सरकार बनाई थी। उस चुनाव में रायकोट से कांग्रेस पार्टी के ही प्रत्याशी निर्मल सिंह महंत चुनाव जीतकर विधायक बन गए थे, लेकिन 1997 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने निर्मल सिंह महंत की टिकट काट कर हरमोहिंदर सिंह प्रधान पर दाव खेला था। हरमोहिंदर सिंह प्रधान तो चुनाव जीत गए लेकिन पंजाब में अकाली दल की सरकार बन गई थी।
2002 के विधानसभा चुनाव में रायकोट से अकाली दल के जत्थेदार रंजीत सिंह तलवंडी चुनाव जीत गए थे लेकिन पंजाब में सरकार कांग्रेस की बन गई थी। 2007 विधानसभा चुनाव में रायकोट से एक बार फिर कांग्रेस के हरमोहिंदर सिंह प्रधान ने चुनाव जीता लेकिन पंजाब में अकाली दल की सरकार बन गई। 2012 में विधानसभा हलका रायकोट को एससी रिजर्व घोषित कर दिया गया।
इसके बाद एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया। रायकोट से कांग्रेस प्रत्याशी गुरचरन सिंह बोपाराय ने जीत हासिल की लेकिन पंजाब में सरकार अकाली दल की बन गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर सिटिंग एमएलए गुरचरन सिंह बोपाराय का टिकट काट कर उनके बड़े भाई डॉ. अमर सिंह बोपाराय को दिया। लेकिन चुनाव में मालवा क्षेत्र में आप की आंधी चली और कांग्रेस के डॉ. अमर सिंह बोपाराय को आप प्रत्याशी जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल ने बुरी तरह हरा दिया। हालांकि इस बार पंजाब में कांग्रेस की सरकार बन गई।