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तस्वीरें: ज्वालामुखी फटने के बाद राख से ढक गए घर, जीवन का नामोनिशान तक नहीं, 15 लोगों की मौत

Mon, 06 Dec 2021 08:41 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जावा

सार

बताया जा रहा है कि ज्वालामुखी फटने से पहले इंडोनेशिया के टोबेलो से 259 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा की ओर आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे।
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ज्वालामुखी फटने के बाद राखों का गुब्बार - फोटो : पीटीआई
इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर सेमरू ज्वालामुखी फटने के कारण यहां मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई है, वहीं 27 लोग अब भी लापता हैं।  इसकी पुष्टि रविवार को एक टीवी चैनल के हवाले से की गई। बचाव दल ने इस दौरान एक 13 वर्षीय बच्चे का शव भी निकाला। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिसमें कई अस्पताल में भर्ती हैं। सरकार का कहना है कि ज्यादातर लोग ज्वालामुखी फटने के कारण जल गए हैं। 

बताया जा रहा है कि ज्वालामुखी फटने से पहले इंडोनेशिया के टोबेलो से 259 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा की ओर आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे से मिली जानकारी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.0 दर्ज की गई थी। 
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ज्वालामुखी - फोटो : पीटीआई
ज्वालामुखी में हुए धमाके के बाद आसपास के इलाकों में राख और धुएं का गुब्बार फैल गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक राख देखते ही देखते दो जिलों को अपने चपेट में ले चुका है। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने कहा कि 56 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से ज्यादातर जले हुए हैं। उन्होंने कहा कि बचाव दल अभी भी लापता बताए गए 27 ग्रामीणों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, करीब 3,000 घर और 38 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। यहां बचाव दल ने जो मंजर देखा उसमें उखड़ी हुई छतें, मवेशियों की जली लाशें और भूरे रंग की राख बिखरी दिखीं।
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ज्वालामुखी - फोटो : पीटीआई
ज्वालामुखी पिछले एक महीने के अंदर दो बार फट चुका है। विस्फोट के बाद स्थानीय लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में भेजा गया। विमान सेवाओं को भी अलर्ट जारी किया गया है।

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ज्वालामुखी - फोटो : पीटीआई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार दोपहर में माउंट सुमेरू पर स्थित ज्वालामुखी में दोपहर तेज धमाका हुआ। इसके बाद राख और धुएं आसमान में काले बादल की तरह फैल गए। आसपास के गांव भी राख से सफेद दिखने लगे।
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ज्वालामुखी फटने के बाद घायल महिला - फोटो : पीटीआई
आसपास के गांव भी राख से सफेद दिखने लगे। राख की परत इतनी मोटी थी कि दिन में भी अंधेरे का अहसास हो रहा था। लोगों को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
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