शिव की साधना की महारात्रि के मौके पर तीर्थनगरी हरिद्वार में भक्तों ने विभिन्न गंगा घाटों पर पवित्र डुबकी लगाई। तस्वीरें देखें...
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साधना की 'महारात्रि' पर भक्तों ने हरिद्वार में लगाई पवित्र डुबकी
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गंगा स्नान
तड़के ही हरिद्वार के गंगा घाटों में भक्तों का जमावड़ा लग गया। राज्य के लोगों के साथ ही दूसरे राज्य के लोगों ने गंगा में डुबकी लगाकर भगवान शिव की स्तुति की।
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- फोटो : amar ujala
अध्यात्म में तीन महारात्रियों का वर्णन है। कालरात्रि, महारात्रि और महोरात्रि तीन ऐसी राते हैं जो भारतीय चिंतन के लिए विशेष महत्व रखती हैं।
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हरिद्वार धरती का कण-कण भगवान शंकर के चिन्हों से भरा पड़ा है। पूजा, अनुष्ठान और साधना की महारात्रि आज पड़ रही है। भगवान शंकर चार पहर पूजे जाएंगे
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दीपावली और होली की रात्रि कालरात्रि कही गई है। नवरात्र की रात्रि को महो अथवा अहोरात्रि कहा जाता है। शिवरात्रि की रात्रि महारात्रि कही गई है। तीनों रात्रियों का विशेष महत्व है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था।
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उनके मिलन की रात्रि महारात्रि बन गई। इस रात्रि में यदि पार्थिव शिवलिंग का पूजन विधि विधान के साथ किया जाए तो विशेष फल मिलता है। धर्म ग्रथों में अनेक प्रकार की पूजा का विधान है। रात के चार पहर शिव पूजा के लिए अति विशिष्ठ हैं।
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चार पहर पूजा सायं सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होती है और अगले दिन सवेरे सूर्योदय तक चलती है। इन चार पहरों में अर्द्घ रात्रि में पड़ने वाले मध्य पहर और सवेरे के प्रदोष पहर का विशेष महत्व है। स्वेत वस्त्र धारण कर पूजा करने से भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं।
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कनखल के दक्षेश्वर मंदिर में साक्षात शिव विराजमान हैं। पार्वती से विवाह के पूर्व इसी कनखल नगरी में शिव का विवाह राजा दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। इस मंदिर में पूजा से दो महारात्रियों का फल भक्तों को प्राप्त होता हैं। कनखल और हरिद्वार के सभी पौराणिक मंदिर भगवान शिव के किसी न किसी आख्यान से जुड़े हुए हैं।
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सभी मंदिरों में लाखों श्रद्घालु भगवान शंकर का अभिषेक करने को तैयार हैं। शिव जटाओं से निकली पतित पावनी गंगा का जल लेकर लाखों शिव भक्त अपने गांव-शहरों के शिवालयों में अभिषेक करेंगे। भगवान आशुतोष इस पावन पुण्य भूमि को अपने कृपा से आच्छादित करने के लिए शिवालयों में विराजमान हैं।