केदारनाथ यात्रा के लिए 35 दिन का समय शेष रह गया है। ऐसे में शासन-प्रशासन ने यात्रा तैयारियों को लेकर कमर कस दी है। बावजूद इसके गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से लिनचोली के बीच यू पसरे पड़े है टूटे ग्लेशियर, जिससे रास्ता बाधित हो रखा है।
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केदारनाथ की राह में अब भी है 'आपदा'
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केदारनाथ मार्ग
- फोटो : amar ujala
धाम को जोड़ने वाली सड़क अब भी बदहाल बनी हुई है। जबकि इस बार तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की बात हो रही है। केदारनाथ पैदल मार्ग लिनचोली से छानी कैंप के बीच कई स्थानों पर इस तरह से क्षतिग्रस्त हो रखा है।
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केदारनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष गंगोत्री-यमनोत्री के साथ अक्षय तृतीया के दिन शुरू हो रही है। यात्रा तैयारियों का जायजा लेने के लिए राज्यपाल के सलाहकार रविवार को केदारनाथ का निरीक्षण कर चुके हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर छानीकैंप के निकट ग्लेशियर फैला हुआ है।
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गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग की स्थिति दयनीय बनी हुई है। गौरीकुंड से भीमबली के बीच में कई बोल्डर पड़े हुए हैं। रामबाड़ा से छोटी लिनचोली के बीच चार सौ मीटर रास्ता भूस्खलन व भू-धंसाव से ध्वस्त हो रखा है। केदारनाथ यात्रा के लिए रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट के बीच पैदल रास्ते में जमी बर्फ को काटकर निम पैदल रास्ता बहाल कर रहा है।
छोटी लिनचोली से छानीकैंप के बीच तीन बड़े ग्लेशियर टूटे हैं। धाम में पुनर्निर्माण में जुटे निम ने रास्ते से आवाजाही के लिए प्रभावित स्थानों पर बर्फ और मिट्टी को काटकर एक फीट चौड़ी पगडंडी बनाई है। शनिवार को खच्चरों से पैदल रास्ते निम का राशन भी पहुंचा है। हालांकि केवल 35 दिनों में रास्ता को ठीक करना किसी चुनौती से कम नहीं है।