प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने धर्म की नगरी काशी में चंद्रग्रहण से जुड़ा एक मिथक तोड़ दिया। सीएम योगी बुधवार को संत रविदास जयंती पर बनारस में उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धन पहुंचे थे। आगे की स्लाइड्स में जाने पूरा मामला...
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वर्ष के पहले चंद्रग्रहण के नौ घंटे पूर्व ही सूतक काल लगने के कारण पूजा-पाठ और कई नित्यक्रियाएं पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाती हैं।
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योगी आदित्यनाथ जिस वक्त वाराणसी में संत रविदास का दर्शन करने और लंगर में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे थे उस वक्त ग्रहण का सूतक काल चल रहा था।
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बावजूद इसके उन्होंने दर्शन भी किया और प्रसाद के लिए जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण किया। काशी के विद्वानों का कहना है कि सुबह करीब 8:52 पर ही ग्रहण का सूतक काल शुरू हो चुका था।
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सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद होने के साथ ही गंगा आरती का समय भी बदल दिया गया था। साथ में भोजन पानी एवं दर्शन पूजन भी पूरी तरह से प्रतिबंध होता है।
यह बातें शास्त्र सम्मत हैं और इनका पालन करना हर किसी के लिए जरूरी है। बावजूद इसके योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास मंदिर में दर्शन करने के बाद लंगर में पहुंचकर प्रसाद भी ग्रहण किया।