वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को लोकसभा में मोदी सरकार का लगातार पांचवां और अंतिम बजट पेश किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गये बजट पर वाराणसी के उद्यमियों, अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों और चार्टर्ड एकाउंटेंट ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। 'आयुष्मान भारत' योजना का लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया है। इस योजना के अंतर्गत 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए का हेल्थ बीमा मिलेगा। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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बीएचयू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर गौर ने इस बजट को बढिया करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बजट से यह साफ है कि सरकार जनकल्याण के लिए खर्च करना चाहती है। स्वास्थ सेवाओं में किये गए खर्च से निश्चित रूप से लोगों का फायदा होगा। कृषि से जुड़े लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को इस बजट से खुश होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका फायदा निचले पायदन तक पहुंचना चाहिए। सरकार यह तय करे कि उसके द्वारा किया जा रहा खर्च का फायदा ग्रासरूट तक पहुंचे।
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- फोटो : पीटीआई
चार्टर्ड एकाउंटेंट अतुल गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट दुरगामी सोच को साबित करने वाला है। सरकार की मंशा प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि कृषि में वृद्धी होगी तो गांवों में लोगों का आय बढ़ेगा। उसका असर कंज्यूमर सेक्टर पर असर पड़ेगा। लोगों का स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ेगा। इस बजट में स्वास्थ्य पर काफी ज्यादा खर्च रखा गया है। सरकार का यह बजट स्वागत योग्य है।
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- फोटो : पीटीआई
चार्टर्ड एकाउंटेंट विजय प्रकाश ने कहा कि बजट में पूर्वांचल के लिए कोई विशेष घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन खेतिहर किसानों के लिए किए गए कई बड़ ऐलान यहां के लिए फायदेमंद साबित होगा। पूर्वांचल और पूरे देश में 80 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर हैं। सरकार का यह घोषणा की किसान के लागत से डेड़गुणा दाम पर उत्पाद लिया जाएगा यह बहुत राहत वाली खबर है। जब किसान खुशहाल रहेंगे तो देश तरक्की की ओर अग्रसर होगा।
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उद्ममी अशोक गुप्ता ने कहा सरकार ने इस बजट में मध्यम आय श्रेणी वालों का ख्याल नहीं रखा। आयकर का स्लैब 50 हजार से उपर होना चाहिए। दिनोंदिन पेट्रोलियम पदार्थों का दाम बढ़ता जा रहा है। उद्ममी और निर्यातकों के लिए किसी प्रकार की छुट नहीं दी गई है। व्यापार जगत के लोगों को मध्यम आय वालों के लिए यह बजट निराशजनक है।
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- फोटो : अमर उजाला
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारी वर्ग ही ऐसा है जो अपनी तनख्वाह का सौ प्रतिशत हिसाब देता है। सरकार से अपेक्षा थी कि पांच लाख तक इनकम टैक्स का दायरा बढ़ाया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिर्फ 40 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन देकर सरकार ने कर्मचारियों की बचीखुची राहत को भी खत्म कर दिया।
नगर निगम कर्मचारी महासंघ के महामंत्री मनोज कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के लिए बहुत ही निराशाजनक बजट है। इनकम टैक्स स्लैब में कोई भी बदलाव न होने से कर्मचारी अत्यंत निराश है। उनको कोई फायदा बजट में नहीं हुआ। कारपोरेट टैक्स में भारी छूट देना इस बात का द्योतक है कि सरकार पूंजीपतियों के लिए है और आमनागरिक और कर्मचारियों से कुछ लेना देना नहीं है।