भारत बंद के दौरान यूपी के एक जिले में सोमवार को ‘हमें चाहिए आजादी’ के नारे भी गूंजे। शहर से लेकर गांव तक लगे इन नारों के बाद जहां खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं वहीं जिला जिला प्रशासन की नींद उड़ गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
नारे लगाने की घटना के बाद अधिकारी अब घटना के दौरान कराई गई वीडियोग्राफी से नारे लगाने वालों की पहचान करने में जुटे हैं। प्रशासन का मानना है कि हिंसा भी कुछ नेताओं के भड़काने पर हुई थी।
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अभी तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कुछ छात्रों और पाक अधिकृत कश्मीर के अलगाववादियों की तरफ से बीच-बीच में (हमें चाहिए आजादी) के नारे सुनने और देखने को मिल रहे थे, लेकिन सोमवार को एसटी-एससी एक्ट पर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में आजमगढ़ में सड़क पर उतरे तमाम दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं की तरफ से इसी तरह के नारे लगाए गए।
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इसे लेकर जहां अधिकारी वर्ग हतप्रभ रह गया। वहीं सुरक्षा एजेंसियां भी सचेत हो गई हैं। शहर से लेकर गांव तक गूंजने वाले यह नारे कौन-कौन लगा रहे थे, ऐसे लोगों की पहचान के लिए पूरे घटनाक्रम की हुई वीडियोग्राफी को देखा जा रहा है। ताकि ऐसे लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो सके।
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डीएम शिवाकांत द्विवेदी का कहना है कि हमें चाहिए आजादी का नारा लगाने वालों की वीडियोग्राफी के जरिए पहचान करवाई जा रही है। पहचान होने के बाद ऐसे शरारतीतत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसपी अजय कुमार साहनी के अनुसार पार्टी नेताओं के उकसाने पर सगड़ी तहसील मुख्यालय पर भीड़ हिंसक हुई है। इनमें घटनाक्रम की करवाई गई वीडियोग्राफी में कुछ नेताओं की पहचान हो चुकी है। ऐसे लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। शेष अन्य की पहचान करने का क्रम जारी है।