वाराणसी के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक लहरतारा-चौकाघाट पर मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे तक रोजाना की तरह ही जाम लगा था। तभी एक दिल को दहलाने वाली घटना हुई। कार व बस में परिवार और अन्य साथियों संग हंसते-बोलते जा रहे लोगों की चीख तक निकल नहीं पाई। कैंट स्टेशन के समीप निर्माणाधीन फ्लाईओवर कई जिंदगियों पर काल बनकर टूटा। भयावह मंजर देख कई लोगों की आंखे भर आई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी कैंट पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का बीम गिरने के बाद कई वाहन इसकी चपेट में आ गए। मंजर यह था कि बीम के नीचे दबे, फंसे वाहनों से केवल चीखें सुनाई दे रही थीं। अंदर बुरी तरह फंसे लोगों में से कोई हाथ हिला रहा था तो कोई पानी मांग रहा था। किसी गाड़ी में फंसे बच्चे की रोने की आवाज से भी कई लोग दर्द में नजर आए। कहीं-कहीं तो केवल तड़प भर सुनाई दे रही थी।
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वाहनों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और वाहनों तक पहुंचने की जगह न होने के चलते आम लोग चाहकर भी उनकी मदद नही कर पा रहे थे। यह मंजर देख कई लोगों की आंखे भर आई। हजारों टन भार का बीम गिरने की वजह से चपेट में आए वाहन चकनाचूर हो गए। वाहनों के पिचकने, टूटने की वजह से कई लोग इसमें फंस गए।
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बाहर फंसे लोगों को तो बचा लिया गया पर अंदर गाड़ियों में फंसे लोगों की केवल कराह सुनाई दे रही थी। जीवन की उम्मीद में एक स्विफ्ट कार में फंसी महिला हाथ हिला रही थी पर उस तक पहुंचे पर उसे निकालना संभव नही था। वह कार में फंस गई थी। लोग कई बार उसे निकालने का प्रयास किए पर असफलता ही हाथ लगी।
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इसी तरह एक और व्यक्ति भीवाहन में फंसा बचाव के लिए चिल्ला रहा था। कुछ देर बाद पानी मांगने लगा। लोगों ने उसे पानी पिलाया। फ्लाईओवर के नीचे लोग वाहनों में इस कदर फंसे थे कि केवल उनकी चीखें सुनाई दे रही थी। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी अपने आंसू नही रोक पाए।
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कार व बस में परिवार और अन्य साथियों संग हंसते-बोलते जा रहे लोगों की चीख तक निकल नहीं पाई। सोचा भी नहीं होगा कि राह चलते इस तरह काल दबोच लेगा। वाराणसी के लहरतारा कैंट रेलवे स्टेशन रोड पर रोजाना की तरह वाहनों की आवाजाही लगी हुई थी। लहरतारा से लेकर कैंट तक जाम लगा हुआ था। इसी दौरान अचानक धड़ाम की तेज आवाज गूंजी।
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सभी को तो एकबारगी ऐसा लगा कि कोई बड़ी बिल्डिंग भरभरा कर गिर पड़ी हो। हर कोई जहां था वहीं थम सा गया और किसी अनहोनी की आशंका से भर गया। आवाज इतनी तेज थी कि लोगों की नजर बरबस उस ओर उठ गई और नजारा देखकर लोग लहरतारा पुल की ओर दौड़ पड़े। मौके पर जब लोग पहुंचे तो लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर का बीम नीचे गिरा था और उसके नीचे कई वाहन दबे थे।
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किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हो गया। सामने का मंजर इतना खौफनाक था कि हर किसी के मुंह से चीख निकल गई। बीम के नीचे दबी बस, कार, बोलेरो, बाइक पर सवार लोगों के मुंह से चीख तक निकल नहीं पाई। कई वाहन तो सड़क से चिपक गए थे। आसपास के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि दबे लोगों को निकालें तो कैसे?
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मौके पर मौजूद विमल ने बताया कि लोग कांप रहे थे। हादसे में मरने वाले कौन थे, इससे किसी को कोई मतलब नहीं था। बस इंसान थे, यह सोचकर आसपास की महिलाएं तो दहाड़े मारकर रोने लगीं। घर के पुरुषों-बच्चों को चिल्ला-चिल्लाकर बुलाने लगीं कि सामने पुल गिर गया है। उसके नीचे लोग दबे हैं, उन्हें किसी तरह बचाओ। संकरी रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार के चलते हजारों की भीड़ बेबस थी। लोग चाहते हुए भी दबे लोगों को निकाल नहीं पा रहे थे।
घटनास्थल के आस-पास स्थिति कॉलोनियों में कई घरों में भोजन नही बना। जहां खाना बना वहां लोगों के गले से एक भी निवाला नही उतरा। दर्द में भूख दबकर रह गई। लोगों को चीख पुकार, हादसा सताता रहा। देर रात तक केवल घटना को लेकर चर्चा होती रही। लोगों को रात में नींद भी बड़ी मुश्किल से आई। महिलाओं पर इस घटना का काफी असर दिखा।