काशी में कई दिनों से लगातार बढ़ रही गंगा का जलस्तर बुधवार को सुबह चार बजे भोर से ही चेतावनी लेबल 70.26 मीटर से आठ सेमी नीचे 70.18 मीटर पर आकर रूक गया। इससे फिलहाल बाढ़ का खतरा तो टल गया है, लेकिन तटवर्तीय इलाकों के लोगों में अभी भी बाढ़ को लेकर दहशत बनी हुई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार इलाहाबाद में जलस्तर कम होने लगा है। इससे गुरुवार से यहा भी जलस्तर कम होना शुरू हो जाएगा। इस बार हुए जल के बढ़ाव से करसणा में कचरा प्लांट तक पानी पहुंच गया है। हालांकि जिन इलाकों में पानी घुसा है। उन इलाकों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं नगर निगम के करसड़ा प्लांट तक पानी पहुंच गया है। अगर और बढ़ा तो वहां की पूरी व्यवसथाएं चौपट हो जाएंगी। गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर सामनेघाट इलाके में रहने वाले लोगों की जिंदगी नरकीय हो गई है।
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सामने घाट नाले से पानी घुसने के कारण मारुति नगर में बने सैकडों मकान पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। घरों में रहने वाले लोग अब घरों से पलायन करने लगे हैं। सामानों को सुरक्षित दूसरे मंजिल पर रख कर घरों में ताला बंद कर अपने मूल घर के साथ ही रिश्तेदारों यहां शरण लेने के लिए निकल गए हैं।
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पानी भरने के कारण बिजलीं सप्लाई भी बंद कर दी गई है। वहीं कुछ घरों की देख भाल करने के लिए छतों पर रात दिन गुजरने के लिए मजबूर है। खाने पीने के लिए सामान खरीद कर रख लिया गया है। वहीं दूसरी तरफ नगवां नाले से पानी घुसने के कारण नाले के किनारे कटान शुरू हो गया है।
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वरुणा नदी के आस-पास रहने वाले लोगों के साथ ही अब नदी से करीब एक किलोमीटर दूर रहने वाले लोग भी परेशान हैं। रात भर चैन से सोने वाले लोग बुधवार की सुबह हैरत में पड़ गए। जब घर के अंदर और बाहर सीवर का गंदा पानी बह रहा था। वरुणा नदी का पानी सीवर के रास्ते कोनिया के करीब आधा दर्जन इलाकों में पहुंच गया है।
कोनिया नई बस्ती, धोबी घाट, विजईपुरा, माताबारी समेत आस-पास के ऊपरी इलाकों में वरुणा का पानी सीवर लाइन के रास्ते पहुंच गया। कोनिया में रहने वाले दर्जनों लोग तेज दुर्गंध और सीवर के गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। उधर, वरुणा के किनारे बसे मोहल्लों की स्थिति और बदतर होती जा रही है। बुधवार को भी बाढ़ से घिरे लोगों को कोई सरकारी मदद नहीं मिली।