वाराणसी एनकाउंटर: मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, किट्टू ने वर्ष 2011 में दशाश्वमेध क्षेत्र के खालिसपुरा के गोपाल यादव की हत्या करके जरायम जगत में प्रवेश किया था। फिर उसने 29 जुलाई 2015 को मुठभेड़ में मारे गए रोहित सिंह उर्फ सनी के गिरोह का दामन थाम लिया।
इसके बाद शहर के ठेकेदारों, व्यापारियों और डॉक्टरों से किट्टू रंगदारी मांगने के लिए कुख्यात हो गया था। इस बीच किट्टू का नाम गाजीपुर में सराफा कारोबारियों की हत्या व लूट, हत्या के प्रयास और डकैती में लगातार सामने आता रहा। फिर वर्ष 2012 में भोजूबीर में सुपारी लेकर बैंक कर्मी महेश जायसवाल की हत्या में किट्टू का नाम सामने आया।