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बनारस में दिव्यांगो को समर्पित एक अनोखा कैफे, यहां इनके सपनों को मिल रही उड़ान

Thu, 26 Oct 2017 02:46 PM IST
amarujala.com- Written by: उत्पल कांत
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cafe ability - फोटो : javed ali
 मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है...। ये लाइनें बोली व सुनीं तो खूब जाती है लेकिन मुश्किल होता है इनकों आत्मसात करना, और जो ऐसा करते है समाज के लिए एक नजीर बन जाते हैं। इस बात को सच साबित किया है वाराणसी में मलदहिया स्थित विनायका प्लाजा के एक कॉफी हाउस में काम करने वाले लोगों ने। आगे की स्लाइड्स में जानिए ...
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cafe ability - फोटो : javed ali
दरअसल, यहां काम करने वाले सारे लोग दिव्यांग हैं। किसी को चलने-फिरने में दिक्कत है तो कोई खड़े में होने से लाचार। बावजूद इसके यहां काम कर रहे लोगों के चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है। कॉफी हाउस का नाम है कैफे एबिलिटी। संभवत: यह देश का पहला ऐसा कॉफी हाउस है जहां सर्विस से लेकर फूड प्रोडक्शन, हाउस कीपिंग, एकाउंटिंग जैसे सभी काम दिव्यांग ही करते हैं। 
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cafe ability - फोटो : javed ali

सबसे बड़ी बात यहां काम कर रहे दिव्यांग नौकरी नहीं कर रहे बल्कि प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस कॉफी हाउस से मौजूदा समय जुड़े नौ लड़के और चार लड़कियां किसी न किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में अध्यनरत हैं। ऐसा इसलिए कि उनके सपने बड़े हैं। कॉफी हाउस के मैनेजर राहुल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि यहां जो भी दिव्यांग बच्चे काम कर रहे हैं वो एबिलिटी फाउंडेशन से जुड़े हैं। इस फाउंडेशन का मकसद दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। 

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cafe ability - फोटो : अमर उजाला
हम यहां इन दिव्यांग बच्चों को एक साल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इस ट्रेनिंग में होस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से जुड़ी सारी बारीकियां सिखाई जाएंगी। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद इन्हें स्टार लेवल वाले होटल और रेस्तरां में प्लेसमेंट कराया जाएगा। सभी बच्चे बनारस और आसपास के गांवों के हैं। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें हर माह वेतन भी दिया जाता है। 
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cafe ability - फोटो : अमर उजाला
कॉफी हाउस के हेड  शेफ अंकुर गुप्ता के अनुसार  एक हादसे का शिकार होने के बाद व्हीलचेयर के सहारे चलने वाली रितु पटेल इस शहर की सबसे अच्छी कॉफी डिजायनर है। यह बात कई मौके पर साबित भी हो चुकी है। यहां ट्रेनिंग पा रहे सभी अपने अपने काम में दक्ष हैं।
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cafe ability - फोटो : social media

यहां काम करने वाले शहनवाज अंसारी ने कहा- मैं गरीब घर से हूं। यहां ट्रेनिंग लेने के साथ-साथ काशी विद्यापीठ से अंग्रेजी में एमए कर रहा हूं। यहां से जुड़ने के बाद मेरा भी अब सपना है कि कुछ दिन काम करूं फिर बनारस में अपना एक बढ़िया रेस्तरां खोलूं।  सन्नी कुमार गौंड  ने कहा- मेरे पापा खेती करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। भगवान ने मुझे ऐसा बनाया कि मैं कुछ करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। यहां आने के बाद अब मुझमें भरोसा आया है। मेरा सपना है कि मैं संजीव कपूर की फेमस कुक बनूं। 
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