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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने इस कमरे के लिए ठुकराई थी अमरीकी नागरिकता, राष्ट्रपति ने दिया प्रस्ताव, आज वहां चला हथौड़ा

Wed, 19 Aug 2020 10:38 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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ustad bismillah khan
शहनाई के उस्ताद भारतरत्न बिस्मिल्लाह खां की स्मृतियों पर अब संकट खड़ा हो गया है। भारतरत्न बिस्मिल्लाह खां जिस कमरे में रियाज किया करते थे, उसे कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाने के लिए तोड़ा जा रहा है। अगली स्लाइड में देखें तस्वीरें...
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तोड़ा गया घर। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका में बसने का न्योता ठुकरा दिया था 
उस्ताद की दत्तक पुत्री पद्मश्री सोमा घोष ने बताया कि उस्ताद ने इसी कमरे में अपनी संगीत की तपस्या की थी और अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का अमेरिका बसने का निमंत्रण सिर्फ एक कमरे में रखी चारपाई पर आने वाली सुकून की नींद के लिए ठुकराया था।
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Ronald Reagan - फोटो : सोशल मीडिया
उस कमरे को तोड़ना कहीं से सही नहीं है। विश्वमोहन भट्ट, रोनू मजूमदार का कहना है कि उस्ताद के रियाज का कमरा हमारे देश की धरोहर है। स्थानीय प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां। - फोटो : अमर उजाला
भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का पैतृक आवास शहर के हड़हासराय स्थित भीखाशाह लेन में है। इस मकान के सबसे ऊपर बने कमरे में उस्ताद फज्र की नमाज के बाद रियाज करते थे। यह कमरा आज भी भारत की धरोहर है, पर अब इस धरोहर को 12 अगस्त की रात से क्षेत्र के एक बिल्डर द्वारा कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाए जाने के लिए तोड़ा जा रहा है। इसको लेकर उस्ताद के छोटे बेटे नाजिम हुसैन और उनकी दत्तक पुत्री पद्मश्री सोमा घोष ने विरोध जताया है। 
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छह साल की उम्र में उस्ताद आए थे बनारस
21 मार्च 1916 को डुमरांव में जन्मे उस्ताद मात्र छह वर्ष की अवस्था में अपने पिता के साथ बनारस आए थे। पहले कुछ साल उन्होंने अपने मामा अली बख्श विलायती के घर में बिताए। इसके बाद उस्ताद बेनियाबाग वाले मकान में आए। 21 अगस्त 2006 को इसी कमरे में उन्होंने अंतिम सांस भी ली।
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