देवों के देव महादेव की नगरी काशी में देव दीपावली पर 84 घाटों पर आयोजन किया गया। इस दौरान घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मान्यता के अनुसार त्रिपुर नामक दैत्य पर विजय के पश्चात देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सेनापति कार्तिकेय के साथ शंकर की महाआरती और नगर को दीपमालाओं से सजाकर विजय दिवस मनाया था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
सभी ने देवताओं की दीपावली में शामिल होते हुए घाट पर दिए जलाए और नौका विहार किया। कई बार तो ऐसा लगा की नौकाओं की भीड़ में गंगा में भी ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न होने लगी। हालांकि हर परिस्थिति से निपटने में माहिर हरफनमौला नाविक सामने से किसी अन्य नाव के आने पर एक खास तरीके की आवाज से उसे रास्ता बदलने का संकेत देते रहे और अपने यान को फंसने से बचाते रहे।
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इस दौरान जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीम लगातार गंगा में चक्रमण करती रही। लोगों ने इस अद्भुत दृश्य का लुत्फ गंगा की अविरल धारा में बजड़ों और नाव पर बैठकर भी लिया। किसी बजड़े को दुल्हन की तरह फूल मालाओं से सजाया गया था।
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परंपराओं को जीवंत रखेन वाली उत्सवधर्मी काशी में शुक्रवार को दोपहर बाद ही दीपोत्सव के लिए लाखों की भीड़ गंगा तट की ओर चल पड़ी। शाम होने से पहले ही घाटों की सीढ़ियां आस्थावानों से खचाखच भर गईं।
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पूरे उत्साह के साथ महिलाएं, बच्चे और युवा घाटों पर दीप सजाने के लिए उतरे। सुरसरि के घाटों पर कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊं नम: शिवाय तो कहीं काशी आओ प्रवासी के स्लोगन दीपों की अल्पनाओं में प्रज्ज्वलित हुए।
गंगा की लहरों पर फूलों से सजे नाव, बजड़े, ध्वज पताका घाटों के सौंदर्य में चारचांद लगा रहे थे। खास बात यह रही कि गंगा के दूसरे किनारे को भी दीप मालाओं जगमग कर दिया। देश के अलग-अलग शहरों से जुड़ी परंपराओं से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही काशी के नृत्य और संगीत की झलक भी घाटों पर बखूबी दिखी।