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काशी में देव दीपावली पर हर तरफ अद्भुत नजारा, तस्वीरों में देखें भव्यता

Sat, 24 Nov 2018 02:01 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : amar ujala
काशी में देवों की दीपावली शुक्रवार को धूमधाम से मनाई जा रही है। शाम से ही गंगा घाटों पर दीपों का चंद्रहार दिख रहा है। घाटों की इस अलौकिक छटा को देखने के लिए देश विदेश से लोगों आए हुए हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
कहीं सुरों की खनक तो कहीं पटाखों की धमक सनाई दे रही है। घाट से लेकर गंगा की लहरों तक फूलों की महक के साथ इंद्रधनुषी अलौकिक छठा देखने को मिल रही है। मानो आकाश के सितारे धरा पर उतर आए हों। 21 लाख दीपों से घाट जगमगा रहे हैं। 

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
पूर्णिमा की शाम जैसे जैसे गहरा रही है बनारस के सभी 84 घाटों सहित 36 कुंडों की रौनक देखते बन रही है। काशी में सिर्फ घाट ही नहीं बल्कि मकानों, दुकानों और सड़कों पर भी लोग दीप जलाकर देवी देवताओं का स्वागत कर रहे हैं। शाम के साथ साथ ही यहां का नजारा अलौकिक होने लगा है। 

 

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varanasi - फोटो : amar ujala
देव दीपावली को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए इस बार घाटों पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। राजघाट से अस्सी के बीच दीपों की जगमगाहट के साथ ही काशी की धर्म, कला और संस्कृति भी झलक भी देखने को मिल रही है। इसके लिए संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग ने खास तैयारियां की हैं। 

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
16 घाटों पर संस्कृति विभाग की ओर से एकल और समूह नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। इस बार सबसे खास बात यह है प्रशासन गंगा के दूसरी तरफ भी दीप दीपावली का आयोजन कर रहा है। प्रदेश के अलग अलग शहरों से जुड़ी पंरपंराओं से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही काशी के नृत्य और संगीत की झलक दिखाई दे रही है।

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
काशी में देव दीपावली की शुरुआत पुरातन काल से मानी जाती है। देव दीपावली का उल्लेख निर्णय सिंधु और स्मृति कौस्तुभी में भी है। संतों-विद्वानों के कथनानुसार काशी के प्रथम शासक दिवोदास ने राज्य में देवी-देवताओं का प्रवेश बंद कर दिया था। छिपे रूप में देवगण कार्तिक मास में पंचगंगा घाट पर गंगा में स्नान के लिए आते थे। बाद में यह प्रतिबंध हट गया।

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
इसे हर्षोल्लास से मनाने के लिए सभी देवी-देवता बनारस में दीपमालाओं से सुसज्जित भगवान शिव की महाआरती के लिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन पधारे थे। मान्यता है कि तभी से देव दीपावली मनाई जाने लगी। वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार त्रिपुर नामक दैत्य पर विजय के पश्चात देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सेनापति कार्तिकेय के साथ शंकर की महाआरती और नगर को दीपमालाओं से सजाकर विजय दिवस मनाया था।

 
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जगमग घाट - फोटो : amar ujala
1986 में पूर्व काशी नरेश स्व. डॉ. विभूति नारायण सिंह ने पंचगंगा पर हजारा दीप जलाकर देव दीपावली की शुरुआत कराई थी। प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर सबसे पहले आरती की शुरुआत 1991 से हुई है। 14 नवंबर, 1997 से गंगा आरती प्रतिदिन की जाने लगी।
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