आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण पूर्वांचल के आजमगढ़ और गाजीपुर के साथ-साथ वाराणसी जिले फिर सुर्खियों में हैं। बावजूद इसके जिलों की पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाइयां अतिरिक्त सतर्कता नहीं बरती जा रही है। यही कारण है कि पुलिस इन घटनाओं की कोई भी कड़ी नहीं जोड़ पाई है। आशंका है कि अगर ऐसे ही लापरवाही बरती जाती रही तो पूर्वांचल में आतंकियों और उनके स्लीपिंग माड्यूल्स के लिए मुफीद ठिकाने बनते रहेंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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ariz khan
- फोटो : vivek nigam
इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के मोस्ट वांटेड आतंकी आजमगढ़ के नसीरपुर निवासी आरिज खान उर्फ जुनैद को मंगलवार को उत्तराखंड से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 20 लाख का इनामी आरिज पांच आतंकी विस्फोटों में शामिल था। बटला हाउस एनकाउंटर के बाद वह नेपाल में रहकर आईएम के आजमगढ़ माड्यूल को सिरे से खड़ा करने की फिराक में था। देश भर की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां आरिज के पीछे लगी हुई थीं। मगर आरिज और उसके करीबियों की गतिविधियों को लेकर आजमगढ़ पुलिस के स्तर से कोई खास गंभीरता नहीं बरती जा रही थी।
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शेख अली अकबर
- फोटो : amar ujala
इससे पहले फरवरी महीने के पहले हफ्ते में ही लखनऊ से एटीएस ने गाजीपुर जिले के जमानिया कोतवाली के कसेरा पोखरा निवासी शेख अली अकबर को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि कश्मीर में गिरफ्तार चार आतंकियों का अकबर सहयोगी थी। अकबर से मिली जानकारी के आधार पर एटीएस ने गाजीपुर से उसके एक दोस्त को भी हिरासत में लिया था। अकबर की गतिविधियों की जानकारी भी गाजीपुर जिले की पुलिस को नहीं थी।
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fidayeen terrorist
इससे पहले बीते साल नवंबर में लखनऊ से लश्कर-ए-तैय्यबा का फरार आतंकी शेख अब्दुल नईम गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले15 दिन नईम बनारस में ठहरा था। नईम ने प्रमुख गंगा घाटों सहित महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की फोटो खींचे थे और वीडियो बनाया था। नईम की गतिविधियों से भी बनारस पुलिस पूरी तरह अनजान थी। मामले ने ज्यादा तूल नहीं पकड़ा और नतीजतन स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने चुप्पी साध ली।
एडीजी जोन पीवी रामाशास्त्री ने कहा है कि जिला पुलिस और इंटेलिजेंस इकाइयों को प्रत्येक स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए सूचनाएं संकलित करने के लिए कहा गया है।