विवाह के दौरान मांगलिक दोष की बाधा कई युवक-युवतियों को परेशान कर सकती है। यह दोष इतना बड़ा है कि यह आपके वैवाहिक जीवन को अशांत कर सकता है और जीवन साथी को पीड़ित भी। हालांकि काशी के ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। बस कुछ सरल उपाय से मंगलदोष का निवारण किया जा सकता है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 7
marriage
भगवान भाष्कर के उत्तरायण होने के साथ ही शुभ कार्य आरंभ हो चुके है। हालांकि शुक्र के अस्त होने के कारण विवाह आदि के कार्य फरवरी माह से आरंभ होंगे। जून माह तक 40 से अधिक लग्न की शुभ तिथियां निर्धारित की गई हैं। वहीं वर्ष के उत्तरार्ध में लग्न का टोटा है। जाड़े में एक भी लग्न नहीं होने के कारण लोगों को निराशा हो सकती है।
विज्ञापन
3 of 7
kundali dosh
श्री काशीविद्वत परिषद के संगठन मंत्री और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि शास्त्र के अनुसार द्वादश लग्न, चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भाव में मंगल के बैठने से मांगलिक दोष उत्पन्न होता है लेकिन जिस भाव में वर की या कन्या की कुंडली में मंगल बैठा हो उसी भाव में वर या कन्या की कुंडली में अगर कोई पापक ग्रह बैठा होता है तो मंगल दोष का स्वत: परिहार हो जाता है।
4 of 7
kundali
- फोटो : facebook
उन्होंने कहा कि अगर जातक में मांगलिक दोष है तो कुछ सरल उपाय जैसे की भगवान शिव की आराधना और काशी के ठठेरी बाजार स्थित मां मंगलागौरी के दर्शन मात्र से ही दोष कम होने लगता है। बात करें रत्नों की तो यह शास्त्रों में उल्लिखित है कि ग्रहाणां तुष्टे रत्नं अर्थात रत्न का धारण ग्रहों की तुष्टि के लिए किया जाता है।
विज्ञापन
5 of 7
सूर्य उपासना
जो लोग रत्न धारण करने में अक्षम हो उन ग्रहों के देवताओं के पूजन मात्र से ही ग्रहजनित पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है। सूर्य के लिए सूर्य, चंद्र के लिए चंद्र, मंगल के लिए बजरंग बली, बुध के लिए गणेश जी, बृहस्पति के लिए भगवान विष्णु, शुक्र के लिए मां लक्ष्मी, शनि के लिए पीपल वृक्ष की आराधना करनी चाहिए।
विज्ञापन
6 of 7
astrology
- फोटो : google
इसके अलावा जड़ियों का भी शास्त्रों में विधान है। सूर्य के लिए बेल, चंद्रमा के लिए खिलनी, खैर की जड़ मंगल के लिए, अपामार्ग की जड़ बुध के लिए, पीपल, पुष्करमूल या भांगरा की जड़ गुरु के लिए, चमेली की जड़ शुक्र के लिए, शनि के लिए समी की जड़ धारण करने से ग्रहों की अनिष्टता में कमी आती है।
पं. द्विवेदी ने बताया कि अगर आप यह भी न कर सकें तो जो ग्रह खराब हो उस रंग की वस्तुओं को भी धारण करने से, उस रंग के वस्त्र पहनने से भी राहत मिलती है।
पं. द्विवेदी ने बताया कि सिर्फ एक लोटा जल आपको सात ग्रहों की पीड़ा से राहत दिला सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि राहु दोषे बुधो हन्यात, द्वभयो शनिश्चराय, त्रयाणाम भूमिजौ हनति, चतुर्णाम दानवर्चिता, पंचानाम दव मंत्रीच कणान दोषात चंद्रमा, सप्तदोषा रविरहन्यात दिशदूत उत्तरायणे अर्थात त्तरायण सूर्य को जल चढ़ाएं व उनकी आराधना करने से सप्तग्रहों के दोषों का शमन शुरू होने लगता है।