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जज्बे को सलाम: बर्फ से निकली जिद, नेट तक पहुंचा सपना; काशी में नेशनल वॉलीबॉल में लद्दाख के खिलाड़ी

Mon, 05 Jan 2026 04:33 PM IST
प्रगति चंद रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए देशभर के खिलाड़ी पहुंचे हैं। इनमें लद्दाख की सीनियर वॉलीबॉल टीम भी शामिल है। पढ़िए- इन खिलाड़ियों के जज्बे और मेहनत से मिली सफलता की कहानी... 
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कोच अब्दुल हुसैन के साथ लद्दाख की महिला टीम - फोटो : अमर उजाला
बर्फीली हवाओं, खुले मैदानों और सीमित संसाधनों के बीच अगर किसी टीम ने अपने सपनों को जिंदा रखा है, तो वह लद्दाख की सीनियर वॉलीबॉल टीम है। जहां न इनडोर स्टेडियम हैं, न आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं, वहां के खिलाड़ी सिर्फ अपने जज्बे और मेहनत के भरोसे 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप तक पहुंचे हैं। वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में उतरती यह टीम सिर्फ एक मैच नहीं खेल रही, बल्कि देश के खेल तंत्र को यह याद भी दिला रही है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि जज्बे, संघर्ष और उम्मीद की कहानी है। 
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लद्दाख वॉलीबाल टीम के कोच अब्दुल हुसैन - फोटो : अमर उजाला
सिगरा स्टेडियम के इनडोर हाल में कोर्ट नंबर दो पर मैच से पूर्व अभ्यास सत्र में लद्दाख वॉलीबाल टीम के कोच अब्दुल हुसैन ने अमर उजाला से बात की। उन्होंने अपने अनुभव और टीम के गेम प्लान पर चर्चा की। बताया कि हमारे यहां एक भी इनडोर स्टेडियम नहीं है। खिलाड़ी खुले मैदानों में, ठंड और तेज हवाओं के बीच अभ्यास करते हैं। इसके बावजूद ये लड़कियां नेशनल खेलने का सपना देखती हैं और उसे पूरा भी कर रही हैं।

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विजेता टीम - फोटो : अमर उजाला
ठंड में पसीना, मैदान बिना छत के
कोच अब्दुल हुसैन बताते हैं, लद्दाख जैसे इलाके में खेल सुविधाओं की कल्पना करना आसान नहीं। सर्दियों में तापमान माइनस में चला जाता है, लेकिन अभ्यास रुकता नहीं। कई बार खिलाड़ी सुबह-सुबह बर्फ हटाकर मैदान तैयार करते हैं, तब जाकर अभ्यास शुरू होता है। न तो आधुनिक जिम हैं, न फिजियोथेरेपी की सुविधा, और न ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर। जब देश के दूसरे राज्यों की टीमें इनडोर कोर्ट, मैट और साइंटिफिक ट्रेनिंग के साथ तैयारी करती हैं, तब हमारे खिलाड़ी सिर्फ अपने हौसले के सहारे खड़े रहते हैं।

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नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में मौजूद खिलाड़ी व अन्य - फोटो : अमर उजाला
नेशनल चैंपियनशिप में खेलना बड़ी बात
लद्दाख की टीम के लिए सीनियर नेशनल तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। खिलाड़ियों में ज्यादातर ऐसे हैं, जो साधारण परिवारों से आते हैं। कई खिलाड़ी पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करते हैं, ताकि खेल जारी रख सकें। यात्रा के लिए फंड जुटाना भी एक चुनौती रहता है। टीम के ज्यादातर खिलाड़ी पहली दफा इतनी बढ़ी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। सच बताऊं तो हमारी टीम ही चार-पांच साल से नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर रही है। हम जानते हैं कि शायद हमें ज्यादा मौके या सुविधाएं न मिलें, लेकिन और टीमों की तरह हमारा भी सपना तिरंगे के नीचे खेलने की है।
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नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में मौजूद खिलाड़ी व अन्य - फोटो : अमर उजाला
खिलाड़ी भले ही छोटे कद के मगर उनका हौंसला बुलंद
लद्दाख वॉलीबाल टीम के कोच मानते हैं कि उनकी टीम के खिलाड़ियों कद एक बड़ी चुनौती है। मगर सीनियर नेशनल में खेलने को लेकर खिलाड़ियों का हौसला बुलंद है। अब्दुल हुसैन बताते हैं कि हम पहाड़ी इलाके से आते हैं। पहाड़ के लोगों की कद-काठी मैदानी इलाकों से भिन्न होती है। वॉलीबॉल में लंबे कद काठी वाले खिलाड़ियों को अतिरिक्त फायदा मिलता है। हमें पता है कि हमें इस चुनौती से कैसे निबटना है। हमारी टीम का पूरा फोकस मैच पर है। हम अपना सौ फीसदी यहां देंगे।

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