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विलुप्त हो रहा आदिवासियों का विश्व प्रसिद्ध लोकनृत्य करमा, जानें खासियत

Thu, 09 Feb 2017 05:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड, हॉलीवुड और भोजपुरी फिल्मों के इस दौर में हमारी प्राचीन संस्कृतिक विरासत कहीं पीछे छूटती जा रही है। सैंकडों साल से हमारी संस्कृति की पहचान नृत्य, गीत और नाटक अब विलुप्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक है सोनभद्र में आदिवासियों द्वारा किया जाने वाला करमा नृत्य । आगे की स्लाइड में जानें खासियत-
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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
करमा नृत्य को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए सरकार ने पिछले दिनों एक अच्छी पहल की। आदिवासी संस्कृति से जुड़ा यह लोक नृत्य अब विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाएगा। इसके लिए करमा नृत्य से जुड़ी तीन टीमें तैयार की गई हैं।
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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
ये टीमें विधानसभा वार मतदाता जागरूकता अभियान के तहत नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को अधिकाधिक मतदान के लिए प्रोत्साहित करेंगी। इसका उद्घाटन आज सदर ब्लॉक से हुआ। सोनभद्र आदिवासी बाहुल्य जिला है।

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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
यहां गोड़, खरवार, चेरो, बैगा, पनिका समेत तमाम आदिवासी जातियां हैं जो करम देव की पूजा करती हैं। धार्मिक रूप से संपन्न करमा लोकनृत्य आदिवासियों के खुशी मनाने की एक विधा भी है, जो तेजी से विलुप्त हो रही है।
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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
करमा नृत्य यूपी, मध्य प्रदेश और बिहार के समूचे आदिवासी इलाके में किया जाता है। इस नृत्य में कोल जाति के पुरुष और महिला दोनों ही भाग लेते हैं। इसमें महिलाएं नृत्य करती हैं और पुरुष ढोल बजाते हैं। इस दौरान गीतों के माध्यम से करमा पेड़ और करमा देवता के बारे में बताया जाता है।
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KARMA DANCE - फोटो : अमर उजाला
अब प्रशासन विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस लोकनृत्य का सराहा लेगा। सरकारी अभिलेखों में विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं का करमा नृत्य करता हुआ लोगो भी लगाया जाएगा, जिसके जरिए आठ मार्च को अधिकाधिक मतदान की अपील की जाएगी।
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