Varanasi News: वाराणसी जिले में गैस सिलिंडर रिसाव से हुए धमाके में मकान ध्वस्त हुआ, जिसमें भाई-बहन की मौत हो गई। वहीं मां और एक बेटा अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में मां आखिरी समय में अपने बच्चों का चेहरा भी नहीं देख सकीं।
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वाराणसी में गैस सिलिंडर रिसाव से धमाके में भाई-बहन की मौत
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी जिले के लहरतारा में गैस सिलिंडर रिसाव से हुए धमाके में मकान ही ध्वस्त नहीं हुआ, बल्कि एक बूढ़ी मां के अरमान भी धराशाई हो गए। मां गिरिजा देवी की आंखों के सामने उनके जवान बेटे-बेटी की मौत हो गई। बेटी को विदा करने और घर में बहू लाने के सपने संजोने वाली मां गिरिजा देवी की जिंदगी मानो पल भर में तबाह हो गई। दोनों बच्चों का अंतिम समय तक चेहरा भी नहीं देख सकीं। दोनों का मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे के साथ घायल गिरिजा देवी बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। रिश्तेदार ट्रॉमा सेंटर देखने पहुंचे तो वह आंखों से आंसू नहीं रोक सकीं। बड़े बेटे अमन चौधरी को होश आ गया। फिलहाल मां और बड़े बेटे दोनों की स्थिति सामान्य है।
ध्वस्त मकान के बाहर जुटे रिश्तेदारों और परिचितों ने बताया कि गिरिजा की इच्छा थी कि बेटी प्रीति की शादी धूमधाम से करें। उसके लिए रिश्ता भी देखा जा रहा था। मंडुवाडीह इंस्पेक्टर अजय राज वर्मा ने बताया की पोस्टमार्टम के बाद भाई-बहन को गिरिजा देवी के भतीजे विशाल और भोलू ने मुखाग्नि दी है।
पड़ोसी सीता देवी ने बताया कि वह अपने घर के बरामदे में बैठी थी तभी अचानक धमाका हुआ तो वह अमन के घर की तरफ दौड़ी। पड़ोसी विकास साहनी और डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि घर से गिरिजा देवी समेत सभी को निकाला गया। तब तक पुलिस और फायर बिग्रेड भी पहुंच गई।
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हादसे के बाद मलबा हटाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
कैंसर अस्पताल के पास तक सुनी गई धमाके की गूंज
लहरतारा में सुबह साढ़े सात बजे धमाके की गूंज कैंसर अस्पताल लहरतारा तक सुनी गई। फुटेज की जांच के दौरान सामने आया एक व्यक्ति पैदल ही मोहल्ले से आगे बढ़ रहा था। गिरजा देवी के मकान से जैसे ही क्लिनिक की ओर बढ़ा तभी तेज धमाका हुआ। युवक तब तक आगे निकल चुका था। वह बाल-बाल गया।
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वाराणसी में गैस सिलिंडर रिसाव से धमाके के बाद जुटे लोग
- फोटो : रोहित सोनकर
पड़ोसी डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि प्रधानमंत्री आवाज योजना के तहत आवास के निर्माण के लिए राशि मिली थी। मकान बन भी गया था। सिर्फ सफाई नहीं हुई थी। निर्माणाधीन मकान के आगे एक छोटा सा कमरा था, उसी में चार सदस्यों का ये परिवार रहता था। गिरजा देवी के पति की पूर्व में मौत हो चुकी थी।
कैब चालक था ओम, किताब की दुकान पर काम करता है अमन
धमाके में जान गंवाने वाला ओम कुमार चौधरी कैब चालक था। जबकि उसका बड़ा भाई अमन चौधरी एक किताब की दुकान पर काम करता है। बहन प्रीति और मां गिरजा घर में रहती थीं। सुबह के समय दोनों भाई अपने-अपने काम पर जाने की तैयारी में थे और बहन प्रीति उनके लिए खाना पका रही थी। तभी अचानक हादसा हुआ।