रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के दौरान हो रही बारिश में भी आस्थावान डटे थे। रेनकोट पहने श्रीराम ने ताड़का वध किया। वहीं, कीचड़ के कारण मूल स्थान से थोड़ा हटकर ताड़का वध की रामलीला हुई। धरती को राक्षसों से मुक्त करने के लिए अवतरित प्रभु श्रीराम ने ताड़का वध से इसका श्रीगणेश किया। राक्षसों का वध कर ऋषियों-मुनियों की यज्ञादि की राह निष्कंटक की।
रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के तीसरे दिन शनिवार को विश्वामित्र आगमन, ताड़का सुबाहु वध, मारीच निरसन, अहिल्या तारण, गंगा दर्शन, मिथिला प्रवेश, श्रीजनक मिलन प्रसंगों की लीला हुई। प्रसंगानुसार विश्वामित्र के आगमन से रामलीला की शुरुआत हुई। ब्राह्मण दल के साथ राजा दशरथ मुनि की अगवानी करते हैं।