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किसी ने न सोचा था गुब्बारों में गैस भरने वाला सिलिंडर भी होगा इतना खतरनाक, देखें तस्वीरें

Mon, 24 Dec 2018 10:42 AM IST
utpal utpal न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के नक्खी घाट पुल के पास सिराजुद्दीन के मकान में रविवार को गुब्बारे में गैस भरते समय टंकी तेज धमाके के साथ फट गई। इससे चार बहनें और तीन किरायेदार सहित आठ लोग घायल हो गए। इनमें से दो की हालत नाजुक है। धमाके से मोहल्ले में घंटों अफरातफरी रही। मौके पर पुलिस-प्रशासन के अफसरों के साथ ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। गैस भरने वाली टंकी में धमाके के बाद आसपास रहने वाले लोग भयभीत हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें..
 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
मकान में किराये पर रह कर लखनऊ निवासी लल्लू पांडेय (50) गैस के गुब्बारे बेचता है। वहीं, बिहार के जमुई निवासी अमरजीत उर्फ बबलू (40) और मंगला सिंह (42) वरुणा कॉरिडोर में काम करते हैं। सुबह 11:30 बजे लल्लू गुब्बारों में गैस भर रहा थे, इसी दौरान तेज धमाका हुआ। टंकी के परखच्चे उड़ गए और आसपास के मकानों में रहने वाले लोग डर से बाहर निकल आए। सिराजुद्दीन ने धमाके से घर के आंगन में खाना बना रहीं उसकी बेटियां गुड़िया (30), सना (13), सन्नो (18) और फिजा (11) घायल हो गईं। साथ ही अमरजीत के दोनों पैर और बायां हाथ उड़ गया। 

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
लल्लू को भी गंभीर चोटें आईं। किरायेदार मंगला और उसके कमरे में मौजूद शिवचरण भी घायल हो गया। लल्लू और अमरजीत की हालत नाजुक बताई गई है।  सूचना पाकर जैतपुरा, सारनाथ, सिगरा, चेतगंज और आदमपुर थाने की फोर्स के साथ एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और घायलों के बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकों से बात की। दीनदयाल अस्पताल से घायलों को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाने में देरी पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने नाराजगी जताई। उधर, इंस्पेक्टर जैतपुरा ने लल्लू और अमरजीत के परिजनों को घटना के संबंध में कॉल कर जानकारी दी है।

 

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
 नक्खी घाट पुल के पास सिराजुद्दीन के मकान में गुब्बारे में गैस भरने वाली टंकी में धमाके के बाद आसपास रहने वाले लोग भयभीत हैं। पड़ोसी रवींद्र यादव, रितेश, रामजी और अनिल विश्वकर्मा आदि ने बताया कि तेज धमाके उनका मकान हिल गया। पहले लगा कि भूकंप आया है, लेकिन जब धमाके की जानकारी हुई तो अनहोनी की आशंका से सभी ने मकान खाली कर दिया।

 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
जैतपुरा पुलिस को पड़ोसियों ने बताया कि लगभग पांच महीने पहले किराये पर कमरा लेने वाला लल्लू पांडेय मकान के बाहर कार्बाइड आदि गिराता था। दुर्गंध से परेशानी होने पर आसपास के लोगों से कई बार उसकी कहासुनी हो चुकी थी। लल्लू से पूछते कि वह गैस कहां से लाता है तो वह कहता खुद ही बनाता है। इसे लेकर मोहल्ले वालों ने खतरे की आशंका जताई थी और कई बार मकान मालिक सिराजुद्दीन से भी शिकायत की थी, मगर दोनों में से कोई सुनने को तैयार ही नहीं होता था। 
 
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azamgarh - फोटो : अमर उजाला
सिराजुद्दीन के मकान में जिस जगह गैस की टंकी फटी, वहां जमीन में करीब एक फीट गहरा गड्ढा हो गया। पास खड़ी साइकिल भी टूट गई। वहीं एक मंजिला मकान की टीन शेड भी उड़ गई। टंकी और टीन शेड के टुकड़े करीब बीस मीटर के दायरे में बिखरे थे। जांच करने आए क्राइम ब्रांच की फोरेंसिक टीम के फील्ड यूनिट और बम निरोधक दस्ते ने टंकी के अवशेष कब्जे में लिए हैं। जांच के लिए अवशेष विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। प्रथम दृष्टया बताया गया कि टंकी काफी पुरानी और पतली हो गई थी, इसी वजह से फट गई।
 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
गुब्बारे की टंकी फटने से जिले में पहले भी हादसे हुए हैं, मगर इन टंकियों की जांच कौन करे, इसे लेकर असमंजस है। जिला आपूर्ति विभाग और दमकल विभाग जांच के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं मानते। इससे पहले अक्तूबर में रामनगर की रामलीला के दौरान गुब्बारे में गैस भरने वाली छोटी टंकी में धमाका हुआ था और बजरडीहा निवासी बाबू घायल हुआ था। छठ पूजा के दौरान भैंसासुर घाट के पास गुब्बारे में गैस भरने वाली टंकी में आग लग गई थी। इस तरह के कई और हादसे हो चुके हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक महकमे की अनदेखी की वजह से खतरे का खेल धड़ल्ले से जारी है।

 

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
गुब्बारे में एसीटिलीन और हीलियम गैस भरी जाती है। यह गैसें दूसरी गैसों से महंगी होती हैं। सस्ते के चक्कर में हाइड्रोजन गैस से गुब्बारे भरते हैं। हाइड्रोजन गैस को कैल्सियम कार्बाइड (स्थानीय भाषा में कार्बेट) से बनाते हैं। यह पानी के साथ रिएक्शन कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। इसकी टंकी में धमाका होने पर 80 ये 100 डेसीबल की आवाज पैदा होती है। यानी धमाके की आवाज एक से डेढ़ किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। 

 
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- फोटो : अमर उजाला
नक्खी घाट पुलिया के पास रहने वालों ने बताया कि लल्लू कार्बाइड, उपले की राख और कुछ अन्य केमिकल मिलाकर इसे कोयले वाले चूल्हे पर गर्म करता था। किसे कितनी मात्रा में मिलाना है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार तो नहीं है, लेकिन गुब्बारे में गैस भरने वाले अनुमान के आधार पर यह काम करते हैं।

 
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