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संकट मोचन संगीत समारोह: रुद्रावतार के दरबार में नृत्य भाव ने सजाया शिव परिवार, झंकृत हुआ बनारस का संगीत घराना

Thu, 02 May 2024 11:26 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Sankat Mochan Sangeet Samaroh: तालयोगी पं. सुरेश तलवरकर ने पखावज के अंदाज में तबला बजाया। उनके साथ तानपुरा संगत प्रो. ओजेश प्रसाद सिंह एवं पूर्णेश भागवत, हारमोनियम पर अमैया बिसु ने संगत की।
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कथक की प्रस्तुति देते पंडित हरीश गंगानी। - फोटो : अमर उजाला
संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में राग रागिनियों से कला साधकों ने हनुमत प्रभु का शृंगार किया। कथक से शिव परिवार और राम दरबार की झांकी सजी, स्वरों से महाबली को भाव अर्पण किया तो बांसुरी की तान छेड़कर प्रभु को रिझाया। शुरुआत कथक से हुई लेकिन रात भर वाद्ययंत्रों की झंकार से पूरा परिसर झंकृत होता रहा।

पांचवीं निशा की शुरुआत जयपुर घराने के पंडित हरीश गंगानी के कथक से हुई। उन्होंने मंच संभालने से पहले मंदिर में हनुमान जी के श्रीचरण में वंदन किया और फिर कला साधना से दर्शकों को विभोर किया। हनुमत दरबार में पहली बार हाजिरी लगा रहे हरीश ने राजस्थान की पारंपरिक रचना रंगीला शंभो गौरा ले पधारो प्यारा पावड़ा... से महाबली के दरबार में भगवान शिव के परिवार को आमंत्रित कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद तीन ताल में शुद्ध नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें थाट, उठान, तोड़ा, टुकड़ा, तिहाई, परन, चक्करदार परन पर नृत्य की अदाएं दिखाईं।
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गायन की प्रस्तुति देते पंडित उल्हास कसालकर। - फोटो : अमर उजाला
तबला और घुंघरू की जुगलबंदी भी बेजोड़ रही जो दर्शकों को पसंद आई। पैरों के सधे अंदाज से दर्शकों की तालियां मिलीं। गोस्वामी तुलसीदास की रचना भरत भाई कपि से उरिन हम नाहिं... पर उन्होंने भक्त हनुमान के विविध भाव दिखाए। भगवान श्री राम द्वारा भरत को हनुमान जी की महिमा का बखान करते हुए भाव में पिरोया। उनके साथ सारंगी पर गौरी बनर्जी सती, तबला पर पं. शुभ महाराज, पखावज पर आशीष गंगानी ने संगत की। गायन एवं हारमोनियम पर विनोद गंगानी रहे।

निशा की दूसरी प्रस्तुति ग्वालियर और आगरा घराने के सधे कलाकार पं. उल्हास कसालकर की रही। ख्याल गायक उल्हास ने राग तिलक कामोद की अवतारणा की। आलापचारी से लेकर तानदारी तक लाजवाब रही। उनके गायन में उनकी साधना नजर आई उन्होंने हर बंदिश को हनुमत प्रभु को अर्पित करते हुए प्रभावी प्रस्तुति से सभी को आनंदित किया। 
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प्रस्तुति देते पंडित निलाद्री कुमार। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद रूपक ताल की बंदिश सुर संगत राग विद्या...सुनाया। उन्होंने झप ताल में विलंबित रचना तीर्थ को सब करें ... के बाद सोहनी राज में देख देख मन ललचाए...और समापन द्रुत ख्याल 12 मात्रा में किया।

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प्रस्तुति देते तेजेंद्र नारायण मजुमदार। - फोटो : अमर उजाला
संगीत का यज्ञ है संकट मोचन संगीत समारोह
संकट मोचन संगीत समारोह में 20 सालों से हाजिरी लगाने आ रहे प्रख्यात गायक उल्हास कसालकर ने कहा कि संकट मोचन संगीत समारोह संगीत का यज्ञ है। यहां पर हनुमत प्रभु को संगीत सुनकर आशीर्वाद लेते हैं। यह संगीत का पवित्र तीर्थ है। संगीत की साधना करने यहां बड़े-बड़े कलाकार आए और आगे भी चलता रहेगा। प्रभु की इच्छा होती है उन्हें ही यहां आने का मौका मिलता है।
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प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
पहली बार मिला हाजिरी लगाने का मौका
संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में पंडित हरीश गंगानी ने पहली बार हाजिरी लगाकर आह्लादित थे। उन्होंने कहा कि मेरी पांच पीढि़यां कथक की साधना कर रही हैं। मगर, मुझे हनुमत दरबार में पहली बार हाजिरी लगाने का मौका मिला है।
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दर्शकों ने कलाकारों के मंचन को सराहा। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धहस्त कलाकारों से सुना करते थे कि यहां पर पूरी रात संगीत की साधना होती है। आज यहां आकर हनुमत प्रभु की कृपा को मैंने महसूस किया। अब ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरी कला साधना सिद्ध हुई।
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इस पेंटिंग ने कलाकारों को किया आकर्षित। - फोटो : अमर उजाला
हनुमान जी की भी फोटो को बनाया कोलाज
बीएचयू गोल्ड मेडलिस्ट और विजुअल आर्ट्स के छात्र सतीश कुमार पटेल ने संकटमोचन में चल रहे संगीत समारोह के 101 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर कलाकारों की 101 तस्वीरों के साथ एक कोलाज बनाया। इसमें कलाकारों के साथ हनुमान जी की भी फोटो लगी दिखाई दे रही है। फोटो की माप 18×12 इंच है, जिनको बनाने में कुल 1.45 मिनट लगे हैं।

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चित्रकारों ने भी दिखाया हुनर। - फोटो : अमर उजाला

पहली बार मिला हाजिरी लगाने का मौका
संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में पंडित हरीश गंगानी पहली बार हाजिरी लगाकर आह्लादित थे। उन्होंने कहा कि मेरी पांच पीढि़यां कथक की साधना कर रही हैं। मगर मुझे हनुमत दरबार में पहली बार हाजिरी लगाने का मौका मिला है। सिद्धहस्त कलाकारों से सुना करते थे कि यहां पर पूरी रात संगीत की साधना होती है। आज यहां आकर हनुमत प्रभु की कृपा को मैंने महसूस किया। अब ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरी कला साधना सिद्ध हुई।

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देसी-विदेशी दर्शको का रहा जमावड़ा। - फोटो : अमर उजाला

राकेश की बांसुरी सुन भक्तों संग हनुमत प्रभु भी हुए मगन
समारोह की तीसरी प्रस्तुति में बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के भतीजे राकेश चौरसिया ने बांसुरी पर ऐसी तान छेड़ी की भक्तों के संग हनुमत प्रभु भी मगन हो गए। उन्होंने जब अधरों से बांसुरी पर फूंक लगाई तो हर कोई उनका मुरीद हो गया। मैहर घराने के राकेश ने बांसुरी पर राग जोग की अवतारणा की।

उन्हें इस वर्ष प्रसिद्ध ग्रैमी अवाॅर्ड मिला है। उन्होंने इस राग में आलाप जोड़ व झाला में बेहतरीन रूप से अपने घराने की विशेषताओं को तराशा। पहाड़ी धुन के बाद बापू के प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम... की धुन बजाकर अपने वादन को विराम दिया। उनके साथ बनारस घराने के संजू सहाय ने तबले पर संगत कर अच्छा तालमेल बैठाया।

वहीं, चौथी प्रस्तुति कर्नाटक से आए जयतीर्थ मेवुंडी की रही। उन्होंने अर्धरात्रि में मंच संभाला और प्रभु श्री राम की महिमा का गान किया। उन्होंने राग मालकौंस में विलंबित एक ताल में बंदिश सुनाई। बोल थे, जिनके मन राम विराजे ...। इसके बाद द्रुत तीन ताल में ‘आज मेरे घर आए बलमा... की प्रस्तुति दी। इनके साथ तबले पर पंडित केशव जोशी, संवादिनी पर मोहित साहनी और सारंगी पर गौरी बनर्जी सती ने संगत की।

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