Varanasi News: संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में 29 मेधावियों को 51 पदक मिले। समारोह के दौरान रूस के कुचुक अर्तेमी मेडल लेने पहुंचे। समारोह में कुलाधिपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान उसकी जीवतंता है।
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संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 29 मेधावियों को 51 पदकों से नवाजा। इसमें 17 छात्रों को 35 और 12 छात्राओं ने 16 पदक प्राप्त किए। इस दौरान रूस के कुचुक अर्तेमी मेडल लेने पहुंचे। समारोह में राज्यपाल ने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति के संवर्धन और युवा शक्ति से ही भारत विश्वगुरु बनेगा।
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कार्यक्रम में राज्यपाल के एक क्लिक दबाते ही डिजी लॉकर में 11959 उपाधियां अपलोड हो गईं। समारोह में कुलाधिपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान उसकी जीवतंता है। पारंपरिक विषयों में छात्राओं की भागीदारी धीरे धीरे बढ़ती जा रही है, यह एक बेहतर कदम है। उन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन तथा संस्कृत अध्ययन से जोड़ने के लिए और अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
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उन्होंने युवाओं से भारतीय भाषाओं, लोककलाओं, योग, आयुर्वेद, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इंडियन नॉलेज सिस्टम से भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रोत्साहन मिल रहा है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के मंच से पहले राज्यपाल ने पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए सराहना करते हुए कुलपति को बधाई दी।
संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह
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मुख्य भवन में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने नैक में ए डबल प्लस ग्रेड न आने पर चिंता जाहिर की। कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार सभी तरह की जरूरत को पूरा करने के लिए बजट जारी कर रही हैं, इसके बाद भी यह हाल है। विकास के काम नहीं हो पा रहे हैं। भवन जर्जर हैं, मेंटेनेंस नहीं कराया जा रहा है।