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सोनभद्र में है दुनिया का सबसे पुराना फासिल्स पार्क, समेटे हुए है धरती का 'रहस्य'

Mon, 10 Apr 2017 10:44 AM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी/सोनभद्र
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
धरती पर ऐसे कई रहस्य छुपे है जिसपर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही रहस्य छुपा है उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिला स्थित सलखन में जहां एक नहीं 150 करोड़ वर्ष पुराने जिवाश्म(फासिल्स) हैं। ये पार्क दुनिया का सबसे बड़ा फासिल्स पार्क है।  25 हेक्टेयर में फैला ये फासिल्स पार्क दुनिया में अमेरिका के यलो स्टोन पार्क से भी बड़ा है। यहां के फासिल्स का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि ये जीवन की शुरुआत की कहानी बयां करते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
 सलखन जीवाश्म पार्क एक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण स्थान है जहां जाकर के पृथ्वी के भूवैज्ञानिक एवं जैविक इतिहास के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह जीवाश्म पार्क पृथ्वी पर जीवन के विकास के आरम्भिक अवस्था का प्रमाण प्रस्तुत करता है। यहां पाये जाने वाले जीवाश्म विश्व के प्राचीनतम जीवाश्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए सलखन जीवाश्म पार्क भारत के लिए ही नहीं अपितु दुनिया के लिए भी एक अमूल्य भूवैज्ञानिक धरोहर है।
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
कुदरत का नायाब तोहफा, दुनिया की अनमोल धरोहर सलखन फासिल्स पार्क उत्‍तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कैमुर वन्‍यजीव अभयारण्‍य के अंदर स्थित है। यह सेंचुरी, रॉबर्ट्सगंज से 17 किमी. की दूरी पर स्थित है जो यहां का जिला मुख्‍यालय है। यह पार्क, सोनभद्र जिले की भू- वैज्ञानिक विरासत का प्रतिनिधित्‍व करता है। सोनभद्र प्रदेश का एक ऐसा महत्वपूर्ण जिला है, जहा पर्यटन विकास के साथ ही पुरातात्विक विकास की असीम संभावनाएं है।
 

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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
विश्व भर में प्रचीनतम सलखन का फासिल्स पार्क जो अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क के फासिल्स से भी 40 करोड़ वर्ष पुराना है। इस पार्क ने सोनभद्र जिले को अनमोल भू-वैज्ञानिक धरोहर से समृद्ध बनाया है। जीवन के सृजन की शुरुआत के साक्षी बने इन जिवाश्मों ने इस तथ्य पर मुहर लगाई कि 150 करोड़ वर्ष पूर्व यहां समुद्र की लहरें हिलोरें मारा करती थी। इस तथ्य के प्रकाश में आने के बाद सोन की संस्कृति भी डेढ़ अरब वर्ष प्राचीन हो गई। 
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
सलखन में लाम स्टोन स्तम्भ एवं दुर्गम दृश्य है, जिसके ऊपरी सतह पर अंकित गोल छल्ले जैसी आकृतियों वाली ये लगभग 1 मीटर ऊंची रचनाएं डेढ़ अरब वर्ष पुराने जीवन आदि रूप के प्रमाण हैं। स्थानीय लोगों में पत्थर के फूल या पेड़ कहे जाने वाली संरचनाएं पृथ्वी पर साढ़े तीन अरब वर्ष पूर्व भी मिलने वाले जीवन के आदि के रूप में सिएनोबैक्टीरिया द्वारा बनाई गयी संरचनाएं हैं। 
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
7 दिसम्बर 2002 को 50 देशो के भू वैज्ञनिकों ने यहां भ्रमण किया था और इसे पूरी दुनिया का सबसे पुराना बहुमूल्य फासिल्स पार्क बताया था। 1933 में इसकी खोज जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया ने की थी। कनाडा के प्रख्यात भूवैज्ञानिक एच.जे हाफमैन सलखन को देखकर बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा था कि इससे खूबसूरत और स्पष्ट जीवाश्म कहीं और नहीं है। अमरीकी सरकार ने पर्यटन के जरिए से अपने येलोस्टोन पार्क को डेवलेप कर लिया है। इससे अमेरिका हल साल लाखों डॉलर की कमाई करता है। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार सलखन जिवाश्म पार्क की ओर ध्यान नहीं दे रही। 
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fossils - फोटो : मुनि शुक्ला
अंतरराष्ट्रीय  स्तर पर पहचान रखने वाला यह पार्क इस समय उपेक्षा का शिकार हो गया है।  हम धरोहरों के संरक्षण के प्रति कितने गंभीर और संवेदनशील हैं ये यहां की दुर्दशा देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। खनन माफियाओं और स्मगलरों द्वारा इसके तस्करी के समाचार आये दिन राष्ट्रीय सुर्खियां बन कर सरकार,प्रशासन.जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय नागरिकों की संवेदन‌शीलता पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं।  प्रदेश में सता परिवर्तन के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि सोनभद्र के इस नायाब चीज को अब राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। 
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