आजमगढ़ में सपा विधायक नफीस अहमद ने शुक्रवार को कहा कि संघी लोग हमें देशभक्ति न सिखाएं। आरएसएस के लोग न तो मुसलमानों के दोस्त हैं और न हिंदुओं के, ये देश के भी नहीं हैं। बीएचयू में आंदोलन करने वाले हिंदू थे और उनका विरोध करने वाले यही ‘दोगले’ थे। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में बच्चे विरोध कर रहे हैं, उनका भी विरोध करने वाले यही हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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nafees ahmad
- फोटो : अमर उजाला
देश में विकास, रोजगार और अन्य मुद्दों पर फेल होने के बाद मोदी और योगी सरकार ध्यान बंटाने के लिए इस तरह के प्रकरण उठा रही हैं। जिला योजना की बैठक के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत में सपा विधायक ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 1938 से जिन्ना की तस्वीर लगी है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
- फोटो : amar ujala
1947 के बाद मुसलमान मौलाना आजाद के नेतृत्व में देश में रुके थे। अगर उन्हें जिन्ना से मुहब्बत होती तो वे पाकिस्तान चले जाते। संघी, जिन्होंने अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को ठगा, वे हमें देशभक्ति न सिखाएं। इतिहास लिखा जाता है, उसे आप बदल नहीं सकते।
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amu and jinnah
1938 में जिन्ना यूनिवर्सिटी में आए थे, उनसे पहले 1920 में महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में आए थे। तब आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी। उस समय जिन्ना भी महात्मा गांधी के साथ फ्रीडम फाइटर थे। यह तस्वीर उस समय की है। संसद में भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ जिन्ना और डा. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के साथ अनेक फ्रीडम फाइटर की तस्वीर लगी है। अगर इनको इतनी ही नफरत है तो सबसे पहले जिन्ना हाउस को नेस्तनाबूद करें।
अगर इनको इतिहास से इतनी ही नफरत है तो राष्ट्रपति भवन से शुरू करें और ताजमहल, लालकिला आदि सभी भवनों को नेस्तनाबूद करें। हमें रोजगार चाहिए, महंगाई पर लगाम चाहिए, विकास चाहिए, इन सब मुद्दों पर मोदी और योगी सरकार फेल है। इसलिए वह लोगों की भावनाओं को भड़का रही है।